मौद्रिक नीति की समीक्षा बैठक से पहले रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने बैंकिंग प्रणाली को 80 हजार करोड़ रुपये की राशि खुले बाजार परिचालन के माध्यम से देने की घोषणा की है। आरबीआई के अनुसार, इस कदम से बैंकिंग सिस्टम में नकदी की स्थिति में सुधार होगा। ओएमओ की घोषणा करते हुए आरबीआई ने कहा []
Published: Wednesday, 2 April 2025 at 01:36 pm | Modified: Thursday, 3 April 2025 at 04:14 pm | By: Kapil Sharma | 📂 Category: कारोबार
मौद्रिक नीति की समीक्षा बैठक से पहले रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने बैंकिंग प्रणाली को 80 हजार करोड़ रुपये की राशि खुले बाजार परिचालन के माध्यम से देने की घोषणा की है। आरबीआई के अनुसार, इस कदम से बैंकिंग सिस्टम में नकदी की स्थिति में सुधार होगा। ओएमओ की घोषणा करते हुए आरबीआई ने कहा कि वह बढ़ती नकदी और बाजार की बदलती परिस्थितियों का आकलन करते हुए नकदी पर नजर रखेगा।
आरबीआई के इस निर्णय को बैंकों के लिए नीतिगत ब्याज दरों में कमी का लाभ सुनिश्चित करने के रूप में देखा जा रहा है। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि रिजर्व बैंक का प्राथमिक उद्देश्य बैंकिंग प्रणाली में पर्याप्त अधिशेष नकदी बनाए रखना है, और ओएमओ की खरीदारी इस योजना का एक संकेत है।
आरबीआई का ध्यान नकदी पर
बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, IDFC फर्स्ट बैंक की मुख्य अर्थशास्त्री गौरा सेन गुप्ता का कहना है कि पहले की स्थितियों से यह स्पष्ट होता है कि नकदी एक लाख करोड़ से दो लाख करोड़ के बीच रहने पर ही परिवर्तन होता है, ऐसे में आरबीआई अपनी लाभांश के कारण इन गतिविधियों को धीमा कर सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि आरबीआई के कदम यह दर्शाते हैं कि वे समुचित नकदी सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
इस बीच, आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने वित्तीय स्थिरता और दक्षता के बीच संतुलन स्थापित करने के लिए विनियामक ढांचे को लचीला बनाने के साथ-साथ उपभोक्ता संरक्षण को मजबूत करने की केंद्रीय बैंक की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया।
आरबीआई गवर्नर ने कहा अगला दशक महत्वपूर्ण
आरबीआई की 90वीं वर्षगांठ के समापन समारोह में उन्होंने कहा कि इसे एक उपलब्धि मानते हुए हम समझते हैं कि आरबीआई की भूमिका प्रारंभिक लक्ष्यों से कहीं अधिक महत्वपूर्ण ढंग से बढ़ी है। उन्होंने कहा कि आज हम परंपरा और परिवर्तन के संगम पर खड़े हैं, जहां मूल्य स्थिरता, वित्तीय स्थिरता और आर्थिक वृद्धि की आवश्यकताएं तेजी से बढ़ती तकनीक, वैश्विक अनिश्चितताओं, जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों और बढ़ती जन अपेक्षाओं के साथ जुड़ती हैं।
गवर्नर ने यह भी कहा कि अगला दशक भारतीय अर्थव्यवस्था के वित्तीय ढांचे को आकार देने में महत्वपूर्ण होगा। आरबीआई वित्तीय समावेश को बढ़ाने के लिए समर्पित है। उन्होंने कहा कि हम ग्राहक सेवाओं में निरंतर सुधार और उपभोक्ता संरक्षण को मजबूत करने की संस्कृति को बढ़ावा देने का प्रयास करेंगे। हमारा लक्ष्य वित्तीय स्थिरता और दक्षता के हितों को संतुलित करते हुए हमारे नियामक ढांचे को लचीला बनाना होगा। हम प्रौद्योगिकी और नवाचार का समर्थन करते रहेंगे और सतर्क, लचीले तथा दूरदर्शी बने रहेंगे।