भारतीय बाजार में विदेशी निवेशकों का रुझान लगातार बढ़ता जा रहा है। यही कारण है कि हाल के समय में शेयर बाजार में जबरदस्त उछाल देखने को मिली है और निवेशकों को होने वाले नुकसान की भरपाई संभव हो पाई है। हाल ही में समाप्त हुए वित्त वर्ष में भारतीय कंपनियों ने विदेशी पूंजी बाजार [...]
Published: Thursday, 3 April 2025 at 01:55 pm | Modified: Friday, 4 April 2025 at 09:59 am | By: Kapil Sharma | 📂 Category: कारोबार
भारतीय बाजार में विदेशी निवेशकों का रुझान लगातार बढ़ता जा रहा है। यही कारण है कि हाल के समय में शेयर बाजार में जबरदस्त उछाल देखने को मिली है और निवेशकों को होने वाले नुकसान की भरपाई संभव हो पाई है। हाल ही में समाप्त हुए वित्त वर्ष में भारतीय कंपनियों ने विदेशी पूंजी बाजार से लगभग 58 हजार करोड़ रुपये जुटाए। इसके परिणामस्वरूप उच्च प्रतिफल वाली प्रतिभूतियों और हेजिंग लागत के लिए वैश्विक निवेशकों की मांग में वृद्धि हुई है।
प्राइम डेटाबेस के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान भारतीय कंपनियों ने 57 हजार 815 करोड़ रुपये जुटाए, जो वित्तीय वर्ष 2024 के मुकाबले 28.5 प्रतिशत अधिक है। वित्तीय वर्ष 2023 में भारतीय कंपनियों ने इसी माध्यम से 15 हजार 592 करोड़ रुपये प्राप्त किए।
बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, रॉकफोर्ट फिनकैप के संस्थापक और प्रबंधन भागीदार वेंकटकृष्णन श्रीनिवासन ने बताया कि रणनीतिक और विनियामक बदलाव, विविधिकरण और वैश्विक तरलता की स्थिति में सुधार के कारण भारतीय जारीकर्ता ऑफशोर बॉण्ड बाजारों में फिर से सक्रिय हो रहे हैं।
उन्होंने आगे कहा कि AAA रेटिंग वाली नवीकरणीय ऊर्जा कंपनियां और सार्वजनिक क्षेत्र की संस्थाएं लंबे समय के वित्त पोषण के लिए अपटतीय बांड बाजारों का उपयोग कर रही हैं, जबकि दूसरी ओर घरेलू तरलता की कमी का सामना कर रही हैं। आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2024-2025 में सबसे बड़ा जारीकर्ता एग्जिम बैंक रहा, जिसने 8643.68 करोड़ रुपये जुटाए। इसके बाद एसबीआई और श्रीराम फाइनेंस का स्थान है।
एसबीआई ने नवंबर 2023 में एनबीएफसी को दिए जाने वाले बैंक ऋणों के लिए जोखिम भार को बढ़ा दिया, जिससे शैडो बैंकों को पारंपरिक बैंक लोन से परे वित्तीय स्रोतों में विविधता लाने के लिए प्रेरित किया गया। यह विनियामकीय कदम एनबीएफसी को घरेलू और विदेशी बॉण्ड बाजारों सहित वैकल्पिक वित्त के रास्ते तलाशने के लिए प्रेरित करता है।
भारतीय रिजर्व बैंक ने भी नवंबर 2023 में एनबीएफसी को दिए जाने वाले बैंक लोन के लिए जोखिम भार को बढ़ाया। इसका परिणाम यह हुआ कि शैडो बैंकों को पारंपरिक बैंक लोन से परे अपने वित्तीय स्रोतों में विविधता लाने के लिए प्रेरित किया गया। एनबीएफसी को इस विनियामकीय निर्णय ने विदेश बॉण्ड के साथ-साथ घरेलू बाजार में वित्त पोषण के नए रास्ते खोजने के लिए मजबूर किया।