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गांव में बोरवेल के लिए 100 से अधिक आवेदन दिए गए, न होने पर ग्रामीण रेंगते हुए भोपाल कमिश्नर ऑफिस पहुंचे

मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के बिशनखेड़ी गांव में पीने के पानी की गंभीर कमी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने इस समस्या का समाधान खोजने के लिए 100 से ज्यादा आवेदन दिए हैं, लेकिन अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। हाल ही में, ग्रामीण इन आवेदनों को एक लंबी [...]

Published: Thursday, 3 April 2025 at 04:32 pm | Modified: Friday, 4 April 2025 at 04:37 pm | By: Kapil Sharma | 📂 Category: शहर और राज्य

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गांव में बोरवेल के लिए 100 से अधिक आवेदन दिए गए, न होने पर ग्रामीण रेंगते हुए भोपाल कमिश्नर ऑफिस पहुंचे

मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के बिशनखेड़ी गांव में पीने के पानी की गंभीर कमी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने इस समस्या का समाधान खोजने के लिए 100 से ज्यादा आवेदन दिए हैं, लेकिन अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। हाल ही में, ग्रामीण इन आवेदनों को एक लंबी कतार बनाकर भोपाल के कमिश्नर कार्यालय तक ले गए।

सीहोर के बिशनखेड़ी गांव में पानी की कमी के कारण ग्रामीण काफी परेशान हैं। इस समस्या का समाधान नहीं होने के पीछे सरपंच पति और राजनीतिक दबाव को जिम्मेदार माना जा रहा है। ऐसे में कमिश्नर ने अधिकारियों को तत्काल गांव में बोरवेल खुदवाने के निर्देश दिए हैं।

राज्य में जल गंगा संवर्धन अभियान चल रहा है, लेकिन बिशनखेड़ी के ग्रामीण भीषण जल संकट का सामना कर रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि ग्रामीणों ने पंचायत सचिव से लेकर कलेक्टर तक इस समस्या की शिकायत की है, फिर भी प्रशासन ने गांव में एक बोरवेल तक नहीं खुदवाया है।

जब ग्रामीणों का जिला प्रशासन से विश्वास उठ गया, तो उन्होंने बुधवार को 5 मीटर लंबी कतार बनाकर भोपाल के संभागायुक्त कार्यालय में न्याय की गुहार लगाई। बिशनखेड़ी में जल संकट को लेकर ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को ज्ञापन भी सौंपा है।

लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग ने नलकूप खनन के लिए निर्देश जारी किए थे, लेकिन यह प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। बजरंगी नागर नाम के एक ग्रामीण ने 100 से ज्यादा आवेदनों की कतार लेकर भोपाल पहुंचकर संभागायुक्त संजीव सिंह को ज्ञापन सौंपा।

उन्होंने आग्रह किया कि जल्द से जल्द नलकूप खनन का कार्य शुरू किया जाए। लेकिन सरपंच पति के दबाव और राजनीतिक कारणों से पीएचई विभाग द्वारा मशीनों को काम करने से रोका जा रहा है।

उच्च स्तरीय राजनीतिक दबाव जल संकट का समाधान करने में बाधा बन रहा है। सीहोर जिला कलेक्टर से चर्चा भी हो चुकी है, लेकिन समस्या का समाधान अब तक नहीं हुआ है। ग्रामीणों ने मांग की है कि एक जांच दल का गठन कर जल संकट की समस्या का समाधान किया जाए और दोषी सरपंच पति और तहसील के अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।

बजरंगी नागर ने कहा कि पीएचई विभाग ने दो बार बोरवेल खुदवाने के लिए मशीन भेजी, लेकिन सरपंच पति ने इसे रोक दिया। दूसरी बार नायब तहसीलदार ने भी मशीन को नहीं चलने दिया।

ग्रामीणों ने बताया कि सरपंच पति ने पानी की टंकी के लिए राशि तो ले ली, लेकिन निर्माण नहीं कराया। इस संबंध में शिकायतें कलेक्टर जनसुनवाई और सीएम हेल्पलाइन पर की जा चुकी हैं।

पीएचई विभाग ने पिछले पांच वर्षों में बिशनखेड़ी पंचायत को पांच विद्युत पंप दिए हैं, लेकिन उनका कोई उपयोग नहीं हुआ। ग्रामीणों ने इस पर भी जांच की मांग की है। पिछले वर्ष सरपंच पति ने अपने घर में सरकारी बोरवेल कराया था, लेकिन उसका पंप गायब कर दिया गया है।

बिशनखेड़ी गांव में 2000 से अधिक की आबादी है, लेकिन केवल 20 हैंडपंप हैं, जिनमें से दो ही काम कर रहे हैं, बाकी सभी सूख चुके हैं।

सीहोर के बिशनखेड़ी गांव के जल संकट की समस्या को लेकर ग्रामीणों के आवेदन पर संज्ञान लेते हुए सीहोर जिला पंचायत के सीईओ और पीएचई के अधिकारियों को समस्या के समाधान के निर्देश दिए गए हैं। संभागायुक्त द्वारा हर सप्ताह पेयजल योजनाओं की समीक्षा की जाती है।

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