अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर लगाए गए 26 प्रतिशत टैरिफ का इंदौर के दवा निर्यात पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा। उद्योग जगत का मानना है कि यह चीन पर बढ़त हासिल करने का एक सुनहरा अवसर हो सकता है। इंदौर के दवा निर्यात पर टैरिफ का कोई असर नहीं पड़ा है। उद्योग [...]
Published: Friday, 4 April 2025 at 03:04 pm | Modified: Saturday, 5 April 2025 at 08:50 am | By: Kapil Sharma | 📂 Category: शहर और राज्य
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर लगाए गए 26 प्रतिशत टैरिफ का इंदौर के दवा निर्यात पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा। उद्योग जगत का मानना है कि यह चीन पर बढ़त हासिल करने का एक सुनहरा अवसर हो सकता है।
इंदौर के दवा निर्यात पर टैरिफ का कोई असर नहीं पड़ा है। उद्योग के विशेषज्ञों ने चीन पर बढ़त हासिल करने की संभावनाएं देखी हैं। टैरिफ नीति से दवा उद्योगों को नुकसान कम और लाभ ज्यादा होने की उम्मीद जताई गई है।
अमेरिकी टैरिफ के बाद इंदौर क्षेत्र के उद्योगों में कोई घबराहट नहीं है। वे वर्तमान स्थिति का आकलन करने में लगे हुए हैं। आशा जताई जा रही है कि घोषित टैरिफ नीति से भारत को नुकसान कम और लाभ ज्यादा प्राप्त होगा। पीथमपुर औद्योगिक संगठन ने इसे ग्लोबलाइजेशन के साथ जोड़ते हुए एक नया अवसर माना है।
पीथमपुर का औद्योगिक क्षेत्र निर्यात के मामले में अग्रणी है। यहां स्थित स्पेशल इकोनामिक जोन में लगभग 100 उद्योग कार्यरत हैं, जो पूरी तरह से निर्यात पर निर्भर हैं। इनमें दवा कंपनियों का प्रमुख स्थान है।
कुल निर्यात में दवाओं की हिस्सेदारी आधी से अधिक है। शेष निर्यात विभिन्न उत्पादों जैसे पैकेजिंग मटेरियल और ऑटोमोबाइल पार्ट्स का है। पीथमपुर औद्योगिक संगठन के अध्यक्ष डॉ. गौतम कोठारी के अनुसार ट्रंप की टैरिफ नीति में दवाओं को टैरिफ से मुक्त रखा गया है।
इसलिए, पीथमपुर के दवा निर्यात पर टैरिफ का कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ने की संभावना है। यदि अन्य उत्पादों पर टैरिफ लागू भी हुआ, तो भारतीय उद्योगों को नुकसान होने की संभावना कम है। अमेरिका ने केवल भारत पर ही नहीं, बल्कि चीन और अन्य देशों पर भी भारी टैरिफ लगाए हैं, जिसका लाभ भारत को होगा।
चीन पर अधिक टैरिफ लागू होने से अमेरिका के लिए वहां से वस्तुएं आयात करना महंगा पड़ेगा। भारत पर लागू टैरिफ चीन के मुकाबले 15 से 18 प्रतिशत कम है, जिससे अमेरिका को चीन की बजाय भारत से सस्ता आयात संभव होगा। इससे अमेरिकी उपभोक्ताओं और आयातकों को महंगाई का सामना करना पड़ेगा।
इसलिए, वे सस्ते आयात के लिए भारत की ओर रुख करेंगे। भारतीय उद्योगों को इसे एक नए अवसर के रूप में देखना चाहिए। उन्हें खुद को अपग्रेड कर बेहतर मैन्युफैक्चरिंग से चीन को पीछे छोड़कर निर्यात बढ़ाने की दिशा में कदम उठाने चाहिए। इसे ऐसे समझा जाना चाहिए जैसे कि यह ग्लोबलाइजेशन के दौरान मिला अवसर था, जिसमें नुकसान कम और लाभ ज्यादा था।
इंदौर क्षेत्र से सोया और इंजीनियरिंग क्षेत्र का निर्यात भी प्रमुखता से हो रहा है। दि सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन आफ इंडिया के कार्यकारी निदेशक डीएन पाठक का कहना है कि सोया उद्योग पर टैरिफ के संबंध में अभी कोई स्पष्टता नहीं मिली है।
पिछले वर्षों में अमेरिका ने कुछ सोया उद्योगों पर पहले से 200 प्रतिशत से अधिक टैक्स लगाया था। ऐसे में इंदौर और मालवा क्षेत्र से सोया डीओसी का निर्यात अन्य देशों को अधिक हो रहा है, अमेरिका को नहीं।
हालांकि भारत पर 26 प्रतिशत टैरिफ लगाया गया है, लेकिन दवा जैसे महत्वपूर्ण निर्यात को मुक्त रखने से राहत मिली है, क्योंकि अमेरिका भारत की दवाओं पर निर्भर है। एसोसिएशन आफ इंडस्ट्रीज मप्र के अध्यक्ष योगेश मेहता का कहना है कि अमेरिकी जनता को महंगाई के चलते अधिक कठिनाई का सामना करना पड़ेगा।
इंजीनियरिंग सेक्टर की कंपनियां अमेरिका को निर्यात करती हैं, लेकिन इंदौर की कुछ प्रमुख कंपनियों ने पहले ही अमेरिका में अपने यूनिट स्थापित कर लिए हैं। इस कारण वर्तमान में बड़ा असर महसूस नहीं किया जा रहा है। अन्य देशों पर टैरिफ लगने से भारतीय उद्योग इन अवसरों का लाभ उठाकर निर्यात बढ़ा सकते हैं। एसोसिएशन भी इसी दृष्टिकोण से उद्योगों के लिए नए अवसर खोजने में लगी है, क्योंकि भारत पर उच्च टैरिफ दरें नहीं लगी हैं।