मध्य प्रदेश सरकार ने लाड़ली लक्ष्मी योजना के तहत कई जिलों में बजट आवंटन में देरी की है, जिसके कारण 36 हजार से ज्यादा योग्य बालिकाओं को पिछले वित्तीय वर्ष की किश्त नहीं मिली है। यह योजना बालिकाओं के शैक्षणिक स्तर और स्वास्थ्य की स्थिति में सुधार लाने के उद्देश्य से शुरू की गई थी। [...]
Published: Friday, 4 April 2025 at 03:22 pm | Modified: Saturday, 5 April 2025 at 08:59 am | By: Kapil Sharma | 📂 Category: शहर और राज्य
मध्य प्रदेश सरकार ने लाड़ली लक्ष्मी योजना के तहत कई जिलों में बजट आवंटन में देरी की है, जिसके कारण 36 हजार से ज्यादा योग्य बालिकाओं को पिछले वित्तीय वर्ष की किश्त नहीं मिली है। यह योजना बालिकाओं के शैक्षणिक स्तर और स्वास्थ्य की स्थिति में सुधार लाने के उद्देश्य से शुरू की गई थी।
ग्वालियर से मिली जानकारी के अनुसार, मध्य प्रदेश सरकार ने कई जिलों की योग्य बालिकाओं के लिए लाड़ली लक्ष्मी योजना की पिछली वित्तीय वर्ष की राशि अभी तक नहीं आवंटित की है। इसकी वजह सरकार द्वारा बजट की कमी बताई जा रही है। वास्तव में, लाड़ली लक्ष्मी योजना का बजट एक अलग मद में है, और शासन स्तर पर इसका एक पूल बना हुआ है, जिसमें जिलों को हर वर्ष राशि का आवंटन किया जाता है।
हर वर्ष 20 से 31 मार्च के बीच इस योजना का बजट शासन से पूल में जारी किया जाता रहा है, लेकिन अप्रैल का पहला सप्ताह आने के बावजूद ग्वालियर, बालाघाट, छिंदवाड़ा, झाबुआ सहित कई जिले अभी तक बजट आवंटन से वंचित हैं।
ग्वालियर में 36 हजार से अधिक योग्य बालिकाओं को पिछली वित्तीय वर्ष की किश्त नहीं मिल पाई है। यहां योजना के तहत 22 करोड़ से ज्यादा का भुगतान होना है। ग्वालियर के जिला कार्यक्रम अधिकारी डीएस जादौन ने कहा है कि शासन स्तर से बताया गया है कि धनराशि जल्द ही जारी कर दी जाएगी।
यह उल्लेखनीय है कि वर्ष 2007 में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने लाड़ली लक्ष्मी योजना की शुरुआत की थी। इस योजना का उद्देश्य बालिका जन्म के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करना, लिंग अनुपात में सुधार करना और बालिकाओं के शैक्षणिक स्तर और स्वास्थ्य की स्थिति में सुधार करना है। इसका लाभ उठाने के लिए अभिभावक को बच्ची के जन्म के समय पंजीकरण कराना आवश्यक होता है।
इस योजना के तहत पात्र बच्चियों के खाते में प्रतिवर्ष छह हजार रुपये लगातार पांच वर्षों तक जमा किए जाते हैं। 21 वर्ष की आयु होने पर ब्याज की राशि मिलाकर प्रत्येक बालिका को कुल एक लाख 43 हजार रुपये मिलते हैं।
इसके अलावा, जब प्रदेश में संबल योजना शुरू की गई थी, तब इसके लिए लाड़ली लक्ष्मी योजना के मद से राशि ली गई थी, जिसे बाद में वापस नहीं किया गया। अधिकारियों का कहना है कि लाड़ली लक्ष्मी योजना के मद से राशि लेना संभव है क्योंकि इसमें बड़ी राशि पूल में होती है।