मध्य प्रदेश सरकार ने 20 साल के अंतराल के बाद परिवहन सेवा की शुरुआत करने का निर्णय लिया है। इस पहल के लिए मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा को कैबिनेट से मंजूरी प्राप्त हो गई है। यह बस सेवा पीपीपी मॉडल के तहत चलाई जाएगी और इसके संचालन के लिए एक होल्डिंग कंपनी स्थापित की जाएगी। [...]
Published: Wednesday, 2 April 2025 at 02:39 pm | Modified: Friday, 4 April 2025 at 04:15 pm | By: Kapil Sharma | 📂 Category: शहर और राज्य
मध्य प्रदेश सरकार ने 20 साल के अंतराल के बाद परिवहन सेवा की शुरुआत करने का निर्णय लिया है। इस पहल के लिए मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा को कैबिनेट से मंजूरी प्राप्त हो गई है। यह बस सेवा पीपीपी मॉडल के तहत चलाई जाएगी और इसके संचालन के लिए एक होल्डिंग कंपनी स्थापित की जाएगी।
सरकार बसों को खरीदने के बजाय बस ऑपरेटर्स के माध्यम से उनका संचालन करेगी। इसके लिए एक होल्डिंग कंपनी बनाई जाएगी, जो बसों के संचालन और नियंत्रण का कार्य करेगी। कंपनी के गठन हेतु 101.20 करोड़ रुपये की अंशपूंजी की स्वीकृति दी गई है। जब यह कंपनी लाभ में आएगी, तब लाभांश राज्य सरकार को आवंटित किया जाएगा।
2005 में भाजपा की बाबूलाल गौर सरकार ने साढ़े चार सौ करोड़ के घाटे में चल रहे राज्य सड़क परिवहन निगम को बंद किया था, जिसके बाद से प्रदेश में परिवहन सेवाएं ठप हो गई थी। अब, नई सेवाएं पहले आदिवासी क्षेत्रों से शुरू की जाएंगी।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को मंत्रालय में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में सुगम परिवहन सेवा की शुरुआत को मंजूरी दी गई। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि हमने चुनाव के समय गरीबों को सुगम ट्रांसपोर्ट उपलब्ध कराने का वादा किया था।
इस बार परिवहन सेवा के मॉडल में बदलाव किया गया है। पिछली सरकारों ने इसे बंद कर दिया था, लेकिन अब हम पीपीपी मॉडल पर बसों का संचालन करेंगे। इसके लिए जिला स्तरीय समिति का गठन किया जाएगा, जिसमें जिले के सांसद, विधायक, महापौर और अन्य जनप्रतिनिधि शामिल होंगे।
यह समिति बसों के संचालन की निगरानी और संचालन की व्यवस्था सुनिश्चित करेगी। इसके अलावा, बसों का उपयोग कार्गो सेवा के लिए भी किया जाएगा, और नीति में इसका प्रावधान किया जाएगा। राज्य परिवहन निगम की संपत्तियां कंपनी के नियंत्रण में रहेंगी।
यात्रियों और बस ऑपरेटर्स के लिए एक एप और कंपनी की निगरानी के लिए एक डैशबोर्ड भी बनाया जाएगा। यात्रियों को मोबाइल एप के माध्यम से ई-टिकट की सुविधा मिलेगी। इससे बसों की ट्रैकिंग और यात्रा की योजना बनाने में मदद मिलेगी।
प्रदेश में यात्री बसों के संचालन की त्रि-स्तरीय निगरानी की जाएगी। इसके लिए राज्य स्तर पर एक होल्डिंग कंपनी का गठन किया जाएगा। प्रदेश के सात प्रमुख संभागों में क्षेत्रीय सहायक कंपनियां भी बनाई जाएंगी। इसी उद्देश्य से सभी जिलों में जिला स्तरीय यात्री परिवहन समितियों का गठन किया जाएगा।