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पति के निधन के बाद भी नहीं टूटी हिम्मत, ई-रिक्शा चला कर निभा रही परिवार की जिम्मेदारी

38 वर्षीय महिला पति के निधन के बाद ई-रिक्शा चलाकर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रही हैं। उन्होंने कठिन परिस्थितियों के बावजूद हिम्मत नहीं हारी और अपने बच्चों की पढ़ाई और शादी में मदद की। उनकी मेहनत और दृढ़ संकल्प नारी शक्ति का प्रतीक हैं। आरती शर्मा ने विपरीत परिस्थितियों में भी जीवन से हार [...]

Published: Wednesday, 2 April 2025 at 10:50 pm | Modified: Friday, 4 April 2025 at 12:06 am | By: Kapil Sharma | 📂 Category: शहर और राज्य

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पति के निधन के बाद भी नहीं टूटी हिम्मत, ई-रिक्शा चला कर निभा रही परिवार की जिम्मेदारी

38 वर्षीय महिला पति के निधन के बाद ई-रिक्शा चलाकर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रही हैं। उन्होंने कठिन परिस्थितियों के बावजूद हिम्मत नहीं हारी और अपने बच्चों की पढ़ाई और शादी में मदद की। उनकी मेहनत और दृढ़ संकल्प नारी शक्ति का प्रतीक हैं।

आरती शर्मा ने विपरीत परिस्थितियों में भी जीवन से हार नहीं मानी। पति की मौत के बाद उन्होंने अपने परिवार की जिम्मेदारी संभाली। आर्थिक संकट के बावजूद आरती ने ई-रिक्शा खरीदी। उनकी मेहनत नारी शक्ति और संकल्प का प्रतीक है।

मां दुर्गा के स्वरूप मां चंद्रघंटा शक्ति और समृद्धि की प्रतीक मानी जाती हैं। इनकी आराधना से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और इंसान को आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है। इसी प्रेरणा को अपने जीवन में आत्मसात करते हुए अहमदाबाद की 38 वर्षीय आरती शर्मा ने कठिनाइयों का सामना किया।

पति के निधन के बाद आरती ने अपनी दो बेटियों और एक बेटे की जिम्मेदारी उठाई। उन्होंने मेहनत और हिम्मत से एक नया रास्ता चुना। आज वह ई-रिक्शा चलाकर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रही हैं और समाज में एक मिसाल बन गई हैं।

आरती के पति सुभाष शर्मा अहमदाबाद में रंगाई का काम करते थे। वर्ष 2019 में एक दिन अचानक उनके साथ काम करने वाले व्यक्ति का फोन आया, जिसने बताया कि सुभाष की तबीयत खराब है। यह सुनकर आरती के हाथ-पैर ठंडे पड़ गए। बाद में पता चला कि हार्ट अटैक के कारण सुभाष का निधन हो गया।

आरती बताती हैं कि उस दिन को शब्दों में नहीं कह सकती। उनकी प्रार्थना है कि ऐसा दिन किसी और के जीवन में न आए। पति के जाने के बाद घर में कमाने वाला कोई नहीं था और उस समय उनके पास केवल 500 रुपये थे।

सुभाष के निधन के बाद घर में आर्थिक तंगी बढ़ने लगी। खाने-पीने का सामान भी खत्म होने के कगार पर था। आरती के कंधों पर अब दो बेटियों की शादी और बेटे की पढ़ाई की जिम्मेदारी आ गई।

एक दिन बच्चों के चेहरों को देखकर आरती को एहसास हुआ कि उन्हें अपने परिवार के लिए मजबूत बनना होगा। उन्होंने हिम्मत जुटाई और मेहनत-मजदूरी शुरू की। इधर-उधर से मिली मदद और अपनी मेहनत से उन्होंने धीरे-धीरे पैसे इकट्ठा किए।

वर्ष 2021 में आरती ने अपनी मेहनत से जमा किए गए 50 हजार रुपये से एक ई-रिक्शा खरीदी। शुरुआत में इसे उनके एक रिश्तेदार ने चलाया, लेकिन कुछ महीनों बाद दुर्भाग्यवश उसकी मौत हो गई। यह आरती के लिए एक और बड़ा झटका था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।

आरती ने खुद ई-रिक्शा चलाना सीखा। शुरुआत में लोग उनका मजाक उड़ाते थे, लेकिन उन्होंने इन बातों को नजरअंदाज किया। आज वह ई-रिक्शा चलाकर अपने परिवार का खर्च उठा रही हैं।

आरती की मेहनत रंग लाई। उन्होंने अपनी दोनों बेटियों की शादी कर दी और छोटे बेटे को पढ़ाई के लिए उत्तराखंड के हरिद्वार भेजा। वह कहती हैं कि उन्होंने अपने बच्चों के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। आज वह संतुष्ट हैं कि उनकी मेहनत से उनका भविष्य सुरक्षित है।

आरती की कहानी नारी शक्ति का प्रतीक है, जो साबित करती है कि दृढ़ संकल्प और मेहनत से हर मुश्किल को पार किया जा सकता है।

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