धर्मशास्त्र के अनुसार वैशाख मास को पुण्य के संचय का महीना माना जाता है। इस दौरान तीर्थ स्नान, घट दान, भगवान शिव और भगवान विष्णु की पूजा, तथा तुलसी सेवा का विशेष महत्व होता है। नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन : विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में वैशाख कृष्ण प्रतिपदा 12 अप्रैल से गलंतिका का आयोजन किया []
Published: Wednesday, 2 April 2025 at 03:47 pm | Modified: Thursday, 3 April 2025 at 06:43 pm | By: Kapil Sharma | 📂 Category: आस्था
धर्मशास्त्र के अनुसार वैशाख मास को पुण्य के संचय का महीना माना जाता है। इस दौरान तीर्थ स्नान, घट दान, भगवान शिव और भगवान विष्णु की पूजा, तथा तुलसी सेवा का विशेष महत्व होता है।
नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन : विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में वैशाख कृष्ण प्रतिपदा 12 अप्रैल से गलंतिका का आयोजन किया जाएगा। इस अवसर पर भगवान महाकाल के सिर पर मिट्टी के कलशों से शीतल जलधारा प्रवाहित की जाएगी।
मंदिर की परंपरा के अनुसार वैशाख कृष्ण प्रतिपदा से लेकर ज्येष्ठ पूर्णिमा तक दो महीने तक गलंतिका बांधने की प्रक्रिया होती है। प्रतिदिन भस्म आरती के बाद सुबह 6 बजे से शाम 4 बजे तक गलंतिका का कार्य किया जाएगा।
वैशाख कृष्ण प्रतिपदा से गर्मियों की शुरुआत मानी जाती है। पंडित महेश पुजारी ने बताया कि इस समय भगवान शिव ने समुद्र मंथन के दौरान कालकूट विष का पान किया था, जिससे गर्मी की तीव्रता बढ़ जाती है। इसलिए इस अवधि में गलंतिका बांधने का विधान है, ताकि भगवान को शीतलता प्रदान की जा सके।
ज्योतिषाचार्य पं. अमर डब्बावाला ने बताया कि वैशाख मास में भगवान शिव की प्रसन्नता के लिए गलंतिका बांधने का विशेष महत्व है। इस महीने भगवान विष्णु को चंदन चढ़ाने और तुलसीजी को जल अर्पित करने की परंपरा भी है।
इस दौरान प्याऊ लगाना, पशु और पक्षियों के लिए पानी और दाने का इंतजाम करने से पुण्य का फल प्राप्त होता है।
तीर्थ स्नान का भी विशेष महत्व है। मान्यता के अनुसार विभिन्न तीर्थों पर कल्पवास का महत्व है। यदि कल्पवास संभव न हो, तो प्रतिदिन स्थानीय तीर्थ पर स्नान करके भगवान की पूजा करनी चाहिए। साथ ही, मृतकों की आत्मा की शांति के लिए जल चढ़ाना चाहिए।
वैशाख मास में अवंतिका तीर्थ पर चौरासी महादेव के जलाभिषेक का विधान है। यहां मोक्षदायिनी शिप्रा नदी के रामघाट पर जल अर्पण करने से पुण्य प्राप्त होता है। भगवान विष्णु को चंदन चढ़ाने से विवाह में बाधा आ रही हो, तो शीघ्र समाधान भी होता है।
वैशाख मास में कई पर्व और त्योहार आते हैं।
12 अप्रैल – वैशाख स्नान आरंभ और गलंतिका बंधन।
23 अप्रैल – उज्जैन की पंचकोशी यात्रा की शुरुआत।
24 अप्रैल – वरुथिनी एकादशी व्रत।
27 अप्रैल – वैशाख अमावस्या और पंचकोसी यात्रा का समापन।
30 अप्रैल – अक्षय तृतीया और परशुराम जयंती।
11 मई – वैशाख चतुर्दशी और नृसिंह जयंती।
12 मई – वैशाख पूर्णिमा और गौतम बुद्ध जयंती।