China Tariff on America: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के रेसिप्रोकल टैरिफ के जवाब में अब चीन ने अपनी कार्रवाई शुरू कर दी है। चीन ने 10 अप्रैल से अमेरिका से आयात होने वाले सामानों पर 34 प्रतिशत टैरिफ लगाने की घोषणा की है। इसके साथ ही, चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने 11 अमेरिकी कंपनियों को [...]
Published: Saturday, 5 April 2025 at 03:17 am | Modified: Saturday, 5 April 2025 at 11:28 am | By: Kapil Sharma | 📂 Category: कारोबार
China Tariff on America: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के रेसिप्रोकल टैरिफ के जवाब में अब चीन ने अपनी कार्रवाई शुरू कर दी है। चीन ने 10 अप्रैल से अमेरिका से आयात होने वाले सामानों पर 34 प्रतिशत टैरिफ लगाने की घोषणा की है। इसके साथ ही, चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने 11 अमेरिकी कंपनियों को अपनी ‘अनरिलायबल एंटिटी’ की सूची में शामिल कर लिया है। इसका मतलब है कि इन कंपनियों को गैर भरोसेमंद माना गया है और वे अब चीन में या किसी चीनी कंपनी के साथ बिजनेस नहीं कर सकेंगी।
वाणिज्य मंत्रालय ने अमेरिका को सात विशेष दुर्लभ और हैवी मैटेलिक एलिमेंट्स के एक्सपोर्ट पर रोक लगाने के लिए एक लाइसेंसिंग प्रणाली लागू करने का निर्णय लिया है। इन तत्वों की खदानें चीन में होती हैं और इन्हें वहीं प्रोसेस भी किया जाता है। इनका उपयोग इलेक्ट्रिक कारों से लेकर स्मार्ट बमों तक में किया जाता है।
इसके अलावा, मंत्रालय ने यह भी बताया कि चीन ने मेडिकल इमेजिंग उपकरणों के अमेरिकी निर्यात की जांच शुरू कर दी है। यह उन कुछ मैन्युफैक्चरिंग श्रेणियों में से है जिसमें अमेरिका अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बना हुआ है। साथ ही, चीन अमेरिका से चिकन और ज्वार के आयात पर भी रोक लगाने जा रहा है।
हालांकि, चीन के इस नए टैरिफ का प्रभाव ट्रंप के रेसिप्रोकल टैरिफ की तुलना में कुछ कम होगा क्योंकि चीन अमेरिका को सामान बेचने की तुलना में ज्यादा खरीदता है। पिछले वर्ष चीन ने 147.8 बिलियन डॉलर के अमेरिकी सेमीकंडक्टर, जीवाश्म ईंधन, कृषि उत्पाद और अन्य वस्तुएं खरीदीं। जबकि अमेरिका ने चीन को 426.9 बिलियन डॉलर के स्मार्टफोन, फर्नीचर, खिलौने आदि बेचे। मेक्सिको के बाद चीन अमेरिका से सबसे ज्यादा सामान आयात करता है। कनाडा और मेक्सिको के बाद अमेरिका के लिए चीन का सबसे बड़ा एक्सपोर्ट मार्केट है। हालांकि, ट्रंप ने सेमीकंडक्टर और फार्मास्यूटिकल्स उद्योग को टैरिफ से बाहर रखा है, जबकि चीन ने टैरिफ में कोई छूट नहीं दी है।
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