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भारत ने ट्रंप प्रशासन की पारस्परिक सीमा शुल्क का मुकाबला करने के लिए यह योजना बनाई है

भारत अमेरिका द्वारा अतिरिक्त आयात शुल्क लगाने से उत्पन्न परिस्थितियों पर ध्यान देगा और जल्दबाजी में कोई कार्रवाई नहीं करेगा। इसका कारण यह है कि अमेरिका को अपने घरेलू उद्योग में समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। समाचार एजेंसी पीटीआई ने सरकारी सूत्रों के माध्यम से यह जानकारी दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप [...]

Published: Saturday, 5 April 2025 at 06:37 am | Modified: Saturday, 5 April 2025 at 11:45 am | By: Kapil Sharma | 📂 Category: कारोबार

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भारत ने ट्रंप प्रशासन की पारस्परिक सीमा शुल्क का मुकाबला करने के लिए यह योजना बनाई है

भारत अमेरिका द्वारा अतिरिक्त आयात शुल्क लगाने से उत्पन्न परिस्थितियों पर ध्यान देगा और जल्दबाजी में कोई कार्रवाई नहीं करेगा। इसका कारण यह है कि अमेरिका को अपने घरेलू उद्योग में समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। समाचार एजेंसी पीटीआई ने सरकारी सूत्रों के माध्यम से यह जानकारी दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दो अप्रैल को भारत और चीन समेत लगभग 60 देशों पर 11 से 49 प्रतिशत के जवाबी शुल्क लगाने की घोषणा की, जो नौ अप्रैल से लागू होगा।

एक अधिकारी ने बताया कि भारत के लिए यह एक साथ चुनौतियां और अवसर दोनों लेकर आया है, क्योंकि निर्यात में उसके कई प्रतिस्पर्धी देशों जैसे कि चीन, वियतनाम, बांग्लादेश, कंबोडिया और थाईलैंड को उच्च शुल्क का सामना करना पड़ेगा। सूत्र ने कहा कि हमें स्थिति पर नजर रखने की आवश्यकता है और जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। यह एक नई और अभूतपूर्व स्थिति है। अमेरिका के उद्योग भी इससे नाराज हो सकते हैं और चुनौतियों का सामना कर सकते हैं। हमें धैर्य रखने, अवलोकन करने और समझने की जरूरत है कि इसका भविष्य में क्या प्रभाव पड़ सकता है।

अमेरिका द्वारा आयात शुल्क बढ़ाने का उद्देश्य व्यापार घाटे को कम करना और विनिर्माण को बढ़ावा देना है। भारत पर 26 प्रतिशत शुल्क के संदर्भ में अधिकारी ने कहा कि केवल कुछ क्षेत्रों जैसे झींगा और कालीन को भारी करों का सामना करना पड़ सकता है, जबकि फार्मा और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे अन्य क्षेत्रों को निर्यात बढ़ाने का अवसर प्राप्त होगा, क्योंकि प्रतिस्पर्धी देशों को भारत से अधिक शुल्क चुकाना होगा।

अनुमान के अनुसार, भारत के लगभग 25 प्रतिशत निर्यात को कर में छूट मिली है, जबकि शेष के लिए मिश्रित स्थिति है। इसके अलावा, सोने के आभूषण और कालीन जैसी मूल्य-संवेदनशील वस्तुओं पर शुल्क लगाया जाएगा। अमेरिका वित्त वर्ष 2021-22 से 2023-24 तक भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार रहा है। भारत के कुल वस्तु निर्यात में अमेरिका की हिस्सेदारी लगभग 18 प्रतिशत है, जबकि आयात में यह 6.22 प्रतिशत और द्विपक्षीय व्यापार में 10.73 प्रतिशत है।

भारत का 2023-24 में अमेरिका के साथ वस्तुओं पर व्यापार अधिशेष 35.32 अरब डॉलर रहा। यह आंकड़ा 2022-23 में 27.7 अरब डॉलर, 2021-22 में 32.85 अरब डॉलर, 2020-21 में 22.73 अरब डॉलर और 2019-20 में 17.26 अरब डॉलर था। पिछले वर्ष अमेरिका को भारत के मुख्य निर्यात में औषधि निर्माण और जैविक उत्पाद, दूरसंचार उपकरण, कीमती और अर्द्ध-कीमती पत्थर, पेट्रोलियम उत्पाद, सोना और अन्य कीमती धातु के आभूषण जैसे उत्पाद शामिल थे।

आयात में कच्चा तेल, पेट्रोलियम उत्पाद, कोयला, कोक, तराशे और पॉलिश किए हुए हीरे, इलेक्ट्रिक मशीनरी, विमान और सोना शामिल थे। व्यापार विशेषज्ञों के अनुसार, चीन को 54 प्रतिशत शुल्क का सामना करना पड़ेगा, जिससे भारत में वस्तुओं की डंपिंग की संभावना बढ़ सकती है।

वाणिज्य मंत्रालय अमेरिका द्वारा की गई घोषणाओं के प्रभावों का सावधानीपूर्वक मूल्यांकन कर रहा है। मंत्रालय हितधारकों से उनकी प्रतिक्रिया प्राप्त करने और प्रभाव का आकलन करने के लिए संबंधित मंत्रालयों के साथ संपर्क में है। अमेरिका में भारतीय प्रवासी कीमतों की परवाह किए बिना कृषि निर्यात की वस्तुओं का उपभोग करेंगे। चावल निर्यात के मामले में, जबकि वर्तमान अमेरिकी शुल्क नौ प्रतिशत है, 27 प्रतिशत की वृद्धि के बावजूद भारत वियतनाम और थाईलैंड के मुकाबले बढ़त बनाए हुए है।

साल 2024 में भारत का मछली, मांस और प्रसंस्कृत समुद्री खाद्य निर्यात 2.58 अरब डॉलर रहा। प्रसंस्कृत खाद्य, चीनी और कोको का निर्यात 1.03 अरब डॉलर रहा। इसी प्रकार, देश का अनाज, सब्जियां, फल और मसालों का निर्यात पिछले वर्ष 1.91 अरब डॉलर का था। पिछले साल 18.15 करोड़ डॉलर मूल्य के डेयरी उत्पाद अमेरिका भेजे गए, जबकि खाद्य तेलों का निर्यात 19.97 करोड़ डॉलर रहा। शराब, वाइन और स्पिरिट का निर्यात कुल मिलाकर 1.92 करोड़ डॉलर रहा।

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