मध्य प्रदेश में नक्सल गतिविधियों को रोकने के लिए एक स्टेट इन्वेस्टीगेशन एजेंसी का गठन किया गया है। यह एजेंसी केंद्र की नेशनल इन्वेस्टीगेशन एजेंसी के समान कार्य करेगी। एसआईए नक्सलियों के नेटवर्क का पता लगाएगी और उनके खिलाफ कार्रवाई करेगी। मध्य प्रदेश में नक्सलियों के खिलाफ कार्रवाई जारी है। प्रतीकात्मक तस्वीर HighLights नक्सल गतिविधियों [...]
Published: Wednesday, 2 April 2025 at 02:26 pm | Modified: Friday, 4 April 2025 at 03:46 pm | By: Kapil Sharma | 📂 Category: शहर और राज्य
राज्य ब्यूरो, Newsstate24, भोपाल। नक्सली गतिविधियों को रोकने, जांच करने और उनके खिलाफ ऑपरेशन के लिए प्रदेश में स्टेट इन्वेस्टीगेशन एजेंसी का गठन किया गया है। इसके प्रमुख के रूप में पुलिस मुख्यालय की सीआईडी शाखा के आईजी स्तर का अधिकारी नियुक्त किया गया है।
अधिकारियों का कहना है कि नक्सल प्रभावित अन्य राज्यों में भी इसी प्रकार की जांच एजेंसियों का गठन किया गया है। यह केंद्र की एनआईए की तर्ज पर कार्य करेगी। एनआईए का गठन देश विरोधी गतिविधियों में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई के लिए किया गया है।
केंद्र सरकार के निर्देश पर महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में एसआईए का गठन किया गया है। नक्सलियों ने इन तीनों राज्यों में मिलकर एक जोन बनाया हुआ है। एसआईए के माध्यम से इस जोन में नक्सलियों के खिलाफ कार्रवाई को तेजी मिलेगी।
ज्ञात हो, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मार्च 2026 तक देश से नक्सल समस्या को समाप्त करने का लक्ष्य रखा है। एसआईए का गठन इसी दिशा में एक कदम है। इसका मुख्य कार्य नक्सलियों के नेटवर्क का पता लगाना है।
इसके अलावा, एजेंसी के अन्य कार्यों में नक्सलियों को वित्तीय मदद कहां से मिल रही है, उनके द्वारा उपयोग किए जा रहे हथियारों की आपूर्ति, नए नक्सलियों की भर्ती के तरीके और ग्रामीणों से संपर्क की रणनीति शामिल हैं। मध्य प्रदेश की एसआईए नक्सल गतिविधियों की रोकथाम में एनआईए का सहयोग भी लेगी। पुलिस मुख्यालय के अधिकारियों ने बताया कि एसआईए ने अपने कार्य की शुरुआत कर दी है।
यह जानकारी मिली है कि मध्य प्रदेश के नक्सल प्रभावित बालाघाट, मंडला और डिंडौरी जिलों में 65 से 70 नक्सली सक्रिय हैं। इनमें से लगभग आधी महिलाएं हैं। ये नक्सली मुख्यतः छत्तीसगढ़ या महाराष्ट्र से हैं। मध्य प्रदेश में केवल तीन हैं। पुलिस का प्रयास है कि ये नक्सली आत्मसमर्पण करें या उन्हें मार दिया जाए। साथ ही, नक्सली संगठन में नई भर्ती को रोकना भी पुलिस की प्राथमिकता है।