इंदौर मेट्रो प्रोजेक्ट के तहत अंडरग्राउंड मेट्रो रेल का मार्ग अभी तक निर्धारित नहीं किया जा सका है। बंगाली चौराहे और रीगल तिराहे के बीच मेट्रो किस रूट से गुजरेगी इस पर 289 दिन बीतने के बाद भी कोई सहमति नहीं बन पाई है। मेट्रो प्रबंधन और शहर के जनप्रतिनिधियों के बीच हुई बैठक में [...]
Published: Thursday, 3 April 2025 at 03:34 pm | Modified: Friday, 4 April 2025 at 03:52 pm | By: Kapil Sharma | 📂 Category: शहर और राज्य
इंदौर मेट्रो प्रोजेक्ट के तहत अंडरग्राउंड मेट्रो रेल का मार्ग अभी तक निर्धारित नहीं किया जा सका है। बंगाली चौराहे और रीगल तिराहे के बीच मेट्रो किस रूट से गुजरेगी इस पर 289 दिन बीतने के बाद भी कोई सहमति नहीं बन पाई है। मेट्रो प्रबंधन और शहर के जनप्रतिनिधियों के बीच हुई बैठक में भी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया जा सका।
बुधवार को भी यह तय नहीं हो सका कि बंगाली चौराहे से रीगल तिराहे के बीच अंडरग्राउंड मेट्रो कैसे संचालित होगी। इस मुद्दे पर 17 जून 2024 को मेट्रो अधिकारियों के साथ मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और अन्य जनप्रतिनिधियों की बैठक हुई थी।
289 दिन के अंतराल के बावजूद मेट्रो के अंडरग्राउंड मार्ग को लेकर मेट्रो प्रबंधन और जनप्रतिनिधियों के बीच आम सहमति नहीं बन सकी। बुधवार को मेट्रो प्रबंधन ने हाई कोर्ट के बजाय एक विकल्प के रूप में पलासिया से इंद्रप्रस्थ टावर के बीच मेट्रो को अंडरग्राउंड करने का प्रस्ताव दिया।
मेट्रो अधिकारियों ने नगरीय आवास और विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के नेतृत्व में अन्य जनप्रतिनिधियों को छप्पन दुकान के सामने एमजी रोड पर अंडरग्राउंड योजना को समझाया, लेकिन इसे सभी ने अस्वीकार कर दिया। मंत्री विजयवर्गीय ने कहा कि जो विकल्प मेट्रो के अधिकारियों ने पेश किए हैं, उससे वे संतुष्ट नहीं हैं।
मंत्री ने स्पष्ट किया कि वे एमजी रोड पर मेट्रो को अंडरग्राउंड नहीं करना चाहते हैं क्योंकि इससे सड़क की स्थिति खराब होगी। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने विशेषज्ञों के साथ वैकल्पिक सुझाव दिए हैं ताकि मेट्रो शहर पर बोझ न बने और जनहित में कार्य करे। मेट्रो के अधिकारियों और तकनीकी टीम को अगले एक सप्ताह में नया विकल्प प्रस्तुत करने के लिए कहा गया है।
मंत्री विजयवर्गीय ने कहा कि पहले से बने मेट्रो प्लान में कमी है और इसे जनप्रतिनिधियों से बिना सलाह के तैयार किया गया है। जब पूरा प्लान तैयार होगा, तभी बताया जा सकेगा कि शहर की रिंग कब तक तैयार हो पाएगी। सुपर प्रायोरिटी कॉरिडोर के 5.9 किलोमीटर हिस्से पर मेट्रो चलाने से पहले इसकी उपयोगिता और यात्री संख्या का आंकलन किया जाएगा।
महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने बताया कि मेट्रो को अंडरग्राउंड करने के मुद्दे पर अधिकारियों को तकनीकी विशेषज्ञों के साथ एक नया प्लान लाने के लिए कहा गया है। सभी इस बात पर सहमत हैं कि पलासिया के बाद मेट्रो को तुरंत अंडरग्राउंड ले जाना वर्तमान परिस्थितियों में शहर के हित में नहीं होगा।
पलासिया चौराहे पर प्रस्तावित ब्रिज के संबंध में वरिष्ठ इंजीनियर अतुल शेठ ने कहा कि यदि मेट्रो को वायडक्ट बनाकर लाया गया तो इससे लागत बढ़ेगी और पलासिया के आसपास के लोगों को लाभ नहीं होगा।