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टाटा पंच को पीछे छोड़कर बनी इंडिया की नंबर एक हैचबैक खरीदने के लिए मार्च में शोरूम में रही भीड़

Last Updated: April 03, 2025, 12:56 IST Maruti Wagon R Becomes Bestselling Car: मारुति सुजुकी ने वित्तीय वर्ष 24-25 में 22,34,266 यूनिट्स की रिकॉर्ड बिक्री की है. वैगनआर ने लगातार चौथी बार सबसे ज्यादा बिकने वाली कार का खिताब जीता है. वैगन आर ने पंच को पीछे छोड़कर नंबर 1 का तमगा हासिल किया. हाइलाइट्स [...]

Published: Thursday, 3 April 2025 at 06:49 pm | Modified: Friday, 4 April 2025 at 04:13 pm | By: Kapil Sharma | 📂 Category: ऑटो

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टाटा पंच को पीछे छोड़कर बनी इंडिया की नंबर एक हैचबैक खरीदने के लिए मार्च में शोरूम में रही भीड़

Last Updated: April 03, 2025, 12:56 IST

Maruti Wagon R Becomes Bestselling Car: मारुति सुजुकी ने वित्तीय वर्ष 24-25 में 22,34,266 यूनिट्स की रिकॉर्ड बिक्री की है. वैगनआर ने लगातार चौथी बार सबसे ज्यादा बिकने वाली कार का खिताब जीता है.

वैगन आर ने पंच को पीछे छोड़कर नंबर 1 का तमगा हासिल किया.

हाइलाइट्स

मारुति सुजुकी ने वित्तीय वर्ष 24-25 में 22,34,266 यूनिट्स बेचीं.
वैगनआर लगातार चौथी बार सबसे ज्यादा बिकने वाली कार बनी.
मारुति की घरेलू बिक्री 17,95,259 और एक्सपोर्ट्स 3,32,585 यूनिट्स रही.

नई दिल्ली. भारत के प्रमुख कार निर्माता ने वित्तीय वर्ष 24-25 को शानदार तरीके से समाप्त किया. मारुति सुजुकी ने अपनी इतिहास की सबसे अधिक कुल बिक्री का आंकड़ा पेश किया जो कि 22,34,266 यूनिट्स रहा. वित्तीय वर्ष 23-24 में, कंपनी ने 21,35,323 यूनिट्स की बिक्री की थी. मारुति सुजुकी के लिए यह गर्व का क्षण है कि वैगनआर हैचबैक ने 2022 से लगातार चौथी बार सबसे ज्यादा बिकने वाली कार का खिताब जीता है.

पंच का ताज छीना
इस लोकप्रिय हैचबैक ने टाटा पंच को शीर्ष स्थान से हटा दिया, हालांकि पंच कैलेंडर वर्ष में सबसे ज्यादा बिकने वाली कार थी. वित्तीय वर्ष में अपनी सर्वाधिक बिक्री करने के अलावा, मारुति सुजुकी ने घरेलू और एक्सपोर्ट मार्केट में भी बेहतरीन आंकड़े दर्ज किए, जो क्रमशः 17,95,259 और 3,32,585 यूनिट्स हैं.

मारुति की मंथ ऑन मंथ सेल
महीने-दर-महीने की बिक्री के आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2025 में घरेलू बिक्री 1,60,016 यूनिट्स रही, जो मार्च 2024 के 1,61,304 यूनिट्स से थोड़ी कम है. इसका मुख्य कारण सब-कॉम्पैक्ट सेगमेंट में गिरावट है, जिसमें एंट्री-लेवल हैचबैक जैसे ऑल्टो और एस-प्रेसो तथा कॉम्पैक्ट कारें जैसे वैगनआर, बलेनो, स्विफ्ट, डिजायर, सेलेरियो और इग्निस शामिल हैं.

इंडस्ट्री के विशेषज्ञों और वाहन निर्माताओं को वित्तीय वर्ष 25-26 में 1-2% की मामूली वृद्धि की उम्मीद है. बनर्जी ने यह भी बताया कि भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की पैठ सीमित क्यों है. इसके पीछे तीन मुख्य कारण हैं. पहला, एक ईवी को प्राथमिक कार के रूप में नहीं खरीदा जाता है और यह अक्सर द्वितीयक वाहन के रूप में रहता है. रेंज की चिंता भी एक मुद्दा है. उपभोक्ताओं को ऐसे इलेक्ट्रिक वाहनों की आवश्यकता है जो पर्याप्त ड्राइविंग रेंज प्रदान करें और इसे मजबूत चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर द्वारा समर्थन मिलना चाहिए. इसके साथ ही, विश्वसनीय आफ्टर-सेल्स सेवा की आवश्यकता भी महत्वपूर्ण है, जो ईवी तकनीक में दीर्घकालिक ग्राहक विश्वास बनाने में सहायक होती है.

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