अमेरिका के टैरिफ के प्रभाव का असर भारतीय बाजारों पर दूसरे दिन भी देखा गया है। कारोबारी हफ्ते के अंतिम दिन बाजार में शुरूआत के दौरान सेंसेक्स लगभग 600 अंक गिर गया। वहीं निफ्टी में भी करीब 200 प्वाइंट्स की कमी आई है। इसी दौरान रुपये की मूल्य में भी गिरावट आई है और यह [...]
Published: Friday, 4 April 2025 at 03:33 pm | Modified: Saturday, 5 April 2025 at 08:50 am | By: Kapil Sharma | 📂 Category: कारोबार
अमेरिका के टैरिफ के प्रभाव का असर भारतीय बाजारों पर दूसरे दिन भी देखा गया है। कारोबारी हफ्ते के अंतिम दिन बाजार में शुरूआत के दौरान सेंसेक्स लगभग 600 अंक गिर गया। वहीं निफ्टी में भी करीब 200 प्वाइंट्स की कमी आई है। इसी दौरान रुपये की मूल्य में भी गिरावट आई है और यह अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 84.99 पर पहुंच गया। इससे पहले भी सेंसेक्स और निफ्टी में भारी गिरावट देखी गई थी।
एक दिन पहले भारतीय बाजारों में भारी गिरावट का सामना करना पड़ा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत सहित 60 देशों पर जवाबी शुल्क लगाने की घोषणा के बाद सूचना प्रौद्योगिकी शेयरों में बिकवाली हुई, जिससे बाजार पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा। बीएसई सेंसेक्स 322.08 अंक यानी 0.42 प्रतिशत गिरकर 76,295.36 अंक पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान यह 809.89 अंक तक लुढ़क गया था।
हालांकि, बाद में औषधि शेयरों में तेजी के चलते बाजार ने कुछ हद तक नुकसान की भरपाई की। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी 82.25 अंक यानी 0.35 प्रतिशत गिरकर 23,250.10 अंक पर बंद हुआ। निफ्टी एक समय 186.55 अंक तक गिर गया था।
अमेरिका ने भारत पर 27 प्रतिशत का जवाबी शुल्क लगाने का ऐलान किया है। ट्रंप प्रशासन का मानना है कि भारत अमेरिकी वस्तुओं पर उच्च आयात शुल्क वसूलता है। ऐसे में व्यापार घाटे को कम करने और विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए यह कदम उठाना आवश्यक था। राष्ट्रपति ट्रंप ने वैश्विक स्तर पर अमेरिकी उत्पादों पर उच्च शुल्क दरों का सामना करने के लिए लगभग 60 देशों पर जवाबी शुल्क लगाने की घोषणा की है।
अमेरिकी बाजार पर भी टैरिफ का गहरा असर पड़ा है। ट्रंप के इस निर्णय के कारण ट्रेड वॉर और आर्थिक मंदी की चिंताएं उत्पन्न हो गई हैं, जिसका सबसे बुरा असर अमेरिकी शेयर बाजार पर पड़ा है। कोविड-19 के बाद यह पहली बार है जब अमेरिकी शेयर बाजार में इस तरह की गिरावट देखी गई है।
S&P 500 इंडेक्स में लगभग 4.8% की गिरावट आई, जो जून 2020 के बाद एक दिन में सबसे बड़ी कमी है। इस गिरावट से बाजार को लगभग 2.4 ट्रिलियन डॉलर का नुकसान हुआ है। इसके अलावा, डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज और नैस्डक कंपोजिट में भी इसी तरह की गिरावट देखी गई, जैसी कि कोरोना महामारी के दौरान 2020 में हुई थी। डाउ जोन्स में 4% यानी 1679 अंक और नैस्डक में 6% की गिरावट आई।
टैरिफ के प्रभाव से कमजोर आर्थिक वृद्धि और महंगाई की आशंका के बीच वॉल स्ट्रीट भी लड़खड़ाता हुआ नजर आया। बड़ी टेक कंपनियों और कच्चे तेल के साथ ही अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अन्य मुद्राओं में भी गिरावट का दौर जारी रहा। हालांकि, सोने की कीमत में बढ़ोतरी हुई और निवेशकों ने इसमें पैसा लगाना फायदेमंद समझा।
वैश्विक निवेशक ट्रंप के रेसिप्रोकल टैरिफ के विषय में पूरी तरह से अवगत थे, इसलिए S&P 500 इंडेक्स की स्थिति पर इसका स्पष्ट असर पड़ा और इसमें रिकॉर्ड 10% की गिरावट दर्ज की गई।