अंबिकापुर के पीजी कॉलेज मैदान में हुए सामूहिक विवाह के बाद इस मामले में शिकायत दर्ज की गई थी। प्रारंभिक जांच में आरोप सही पाए गए। इसके बाद जोड़ों को मिलने वाली वित्तीय सहायता रोक दी गई। विवाह का प्रतीकात्मक चित्र। HighLights अंबिकापुर में तीन महीने पहले 362 जोड़ों का सामूहिक विवाह हुआ था। जो [...]
Published: Thursday, 3 April 2025 at 08:34 pm | Modified: Friday, 4 April 2025 at 03:44 pm | By: Kapil Sharma | 📂 Category: शहर और राज्य
Newsstate24 प्रतिनिधि, अंबिकापुर। जिले में महिला एवं बाल विकास विभाग की एक गंभीर लापरवाही उजागर हुई है। यहां पहले से विवाहित जोड़ों को सरकारी योजना के तहत दोबारा विवाह कराया गया। इनमें से दो जोड़ों की पहले से संतान भी थी, लेकिन अधिकारियों ने इसे नजरअंदाज कर दिया।
जब मामला प्रकाश में आया तो जांच का आदेश दिया गया। लाभार्थियों को मिलने वाली राशि का भुगतान भी रोक दिया गया है। लगभग तीन महीने पहले अंबिकापुर में मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत 362 जोड़ों का सामूहिक विवाह संपन्न हुआ था।
अंबिकापुर के पीजी कॉलेज मैदान में आयोजित इस सामूहिक विवाह में नवविवाहितों को आशीर्वाद देने के लिए जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों की उपस्थिति रही। बाद में शिकायत आई कि शादीशुदा जोड़ों ने भी सरकारी योजना का फायदा उठाने के लिए दोबारा विवाह किया है।
विभाग ने तुरंत ऐसे लाभार्थियों के लिए निर्धारित 35-35 हजार रुपये की राशि पर रोक लगा दी। प्रारंभिक जांच में आरोप सही पाए गए। जांच में यह भी सामने आया कि अंबिकापुर विकासखंड के ग्राम पंचायत कुल्हाड़ीखास से तीन ऐसे जोड़े शामिल थे जो पहले से वैवाहिक बंधन में बंधे थे।
इनमें से दो के बच्चे भी थे। इन्होंने सचाई छुपाकर सरकारी योजना का लाभ लेने के लिए फिर से मंडप में बैठकर विवाह की रस्में पूरी की।
सरगुजांचल के ग्रामीण क्षेत्रों में कई ऐसे जोड़े हैं जो लिव इन में रहते हैं। पति-पत्नी के रूप में रहकर उनकी संतान भी होती है, लेकिन उन्हें सामाजिक मान्यता नहीं मिलती। आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण कई परिवार विवाह का खर्च नहीं उठा पाते।
कई बार ऐसे जोड़े सामाजिक मान्यता के लिए सचाई छुपाकर मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत शादी कर लेते हैं। पहले भी ऐसे मामले सामने आ चुके हैं।
गरीब परिवारों को अपनी बेटियों की शादी को सम्मानपूर्वक करने में मदद करने के लिए मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना चलाई जा रही है। इसका उद्देश्य छत्तीसगढ़ के गरीब और जरूरतमंद परिवारों की बेटियों की शादी में आर्थिक सहायता प्रदान करना है।
इस योजना के तहत छत्तीसगढ़ सरकार सामूहिक विवाह का आयोजन करके दहेज मुक्त और बिना दिखावे की शादी को बढ़ावा दे रही है। वर्तमान में इस योजना के अंतर्गत सरकार की ओर से 50 हजार रुपये की राशि दी जाती है।
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वधु के नाम से बैंक ड्राफ्ट के रूप में 35 हजार रुपये नकद, मंगलसूत्र, कपड़े, मेकअप, जूते-चप्पल, चुनरी आदि के लिए सात हजार रुपये दिए जाते हैं। सामूहिक विवाह के खर्च के लिए आठ हजार रुपये मिलते हैं। इस प्रकार कुल 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है।
लाभार्थियों द्वारा प्रस्तुत किए गए शपथ पत्र को सही मानकर योजना का लाभ दिया जाता है। शिकायत मिलने के बाद इस योजना के तहत मिलने वाली सरकारी राशि को रोक दिया गया है। शादीशुदा किसी भी जोड़े को सरकारी सहायता नहीं मिलेगी। मामले की जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। – अतुल परिहार जिला कार्यक्रम अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग सरगुजा
सबसे दिलचस्प बात यह है कि एक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ने अपने ही बेटे और बहू का पुनर्विवाह करवा दिया। यह स्थिति तब है, जब हितग्राहियों के चयन में कार्यकर्ताओं और सुपरवाइजर की बड़ी जिम्मेदारी होती है।
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वे जानते हैं कि किन जोड़ों का विवाह इस योजना के अंतर्गत हो सकता है। मामला उजागर होने के बाद योजना के तहत मिलने वाली सरकारी राशि को रोक दिया गया है।