इंदौर की 14 स्कूली लड़कियों को सैटेलाइट बनाने के लिए प्रशिक्षण दिया जाएगा। इन बच्चियों का चयन मिशन शक्ति सेट के तहत किया गया है और उन्हें इसरो द्वारा 120 घंटे का ऑनलाइन प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस प्रशिक्षण के बाद, ये बच्चियां चंद्रयान मिशन 2026 में योगदान करेंगी। HighLights मिशन शक्ति सेट के तहत स्कूली [...]
Published: Thursday, 3 April 2025 at 01:25 pm | Modified: Friday, 4 April 2025 at 03:52 pm | By: Kapil Sharma | 📂 Category: शहर और राज्य
भरत मानधन्या, Newsstate24, इंदौर। पिछड़े क्षेत्रों की लड़कियों को भी चंद्रयान-4 से जुड़ने का अवसर मिलेगा। ये लड़कियां न केवल अंतरिक्ष विज्ञान में करियर के अवसरों के बारे में समझ प्राप्त करेंगी, बल्कि उन्हें सैटेलाइट निर्माण का व्यावहारिक ज्ञान भी मिलेगा। इसके लिए मिशन शक्ति सेट के अंतर्गत इंदौर की लगभग 14 लड़कियों का चयन किया गया है। ये सभी स्कूली बच्चियां हैं और उन्हें 120 घंटे का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
भारत अंतरिक्ष अन्वेषण के क्षेत्र में निरंतर नई ऊंचाइयों को छू रहा है। अपने अभिनव मिशनों और तकनीकी उपलब्धियों के माध्यम से वैश्विक स्तर पर एक प्रमुख स्थान बना रहा है। इस क्षेत्र में महिलाओं को पुरुषों के साथ मिलकर कार्य करने और सक्रिय रूप से शामिल होने के उद्देश्य से मिशन शक्ति-सेट की शुरुआत की गई है।
यह मिशन चेन्नई स्थित स्पेस किड्स इंडिया द्वारा विकसित किया गया है। मिशन शक्ति सेट की निदेशक और स्पेस किड्स इंडिया की संस्थापक-सीईओ डॉ. केशन ने 16 जनवरी को इस मिशन की शुरुआत की थी। इसके जरिए लड़कियां शोध, नवाचार और नेतृत्व की भूमिकाओं में भी सक्षम होंगी।
मिशन शक्ति सेट में भारत सहित 108 देशों की हाईस्कूल की लगभग 12 हजार छात्राएं भाग लेंगी। इनमें से 130 छात्राएं भारत की होंगी। इन छात्राओं को इसरो और इनस्पेस द्वारा 120 घंटे का ऑनलाइन प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। इसमें अंतरिक्ष तकनीक, पेलोड विकास और अंतरिक्ष यान प्रणालियों से संबंधित विषयों को शामिल किया जाएगा।
इसरो और अन्य वैश्विक संस्थानों के वैज्ञानिकों द्वारा तैयार किया गया यह कार्यक्रम छात्राओं को अंतरिक्ष विज्ञान के व्यावहारिक अनुभव से अवगत कराएगा। प्रशिक्षण के बाद हर देश से एक छात्रा का चयन किया जाएगा और ये 108 छात्राएं चंद्रयान मिशन 2026 में योगदान देंगी और सैटेलाइट विकसित कर उसका प्रक्षेपण करेंगी।
भारत में इस मिशन का नेतृत्व वायुसेना में पायलट रह चुकीं सेवानिवृत्त विंग कमांडर जया तारे कर रही हैं। उन्होंने बताया कि जो लड़कियां अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में अपना करियर बनाना चाहती हैं, उनके लिए यह अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत लड़कियों को विशेषज्ञों द्वारा मेंटरशिप दी जाएगी।
इसके साथ ही 108 देशों की लड़कियां एक ही मंच पर होंगी, जिससे उन्हें एक-दूसरे से जुड़ने का भी अवसर मिलेगा। उन्होंने कहा कि यदि इन छात्राओं को सही दिशा, प्रेरणा और मार्गदर्शन दिया जाए, तो वे न केवल अंतरिक्ष विज्ञान और तकनीक में अद्भुत उपलब्धियां हासिल करेंगी, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्त्रोत भी बनेंगी।
इस अभियान के लिए इंदौर से 14 लड़कियों का चयन किया गया है। वहीं, खरगोन की एक बच्ची राशि चौरे का भी चयन हुआ है। इस तरह इस मिशन के लिए पूरे प्रदेश से 15 लड़कियां चयनित की गई हैं। मध्य प्रदेश में इन लड़कियों का चयन विजय सोशल वेलफेयर सोसाइटी द्वारा किया गया है।
सोसाइटी की संस्थापिका माधुरी मोयदे ने बताया कि वे कई वर्षों से शिक्षकों और विशेषज्ञों के साथ मिलकर लड़कियों को कौशल प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए प्रयासरत हैं। इसी के चलते इस मिशन के लिए इन लड़कियों का चयन किया गया है।
मिशन के लिए चयनित सभी लड़कियां सरकारी स्कूलों की हैं। इनका टेस्ट और इंटरव्यू लिया गया था। चयनित लड़कियों में से अधिकांश बाल विनय मंदिर, सांदीपनि और पीएमश्री स्कूलों की हैं।
तान्या यादव, कुशी तायड़े, कृष्णा खाजेकर, आरती पवार, अक्षरा जैन, शीतल मोरे, सुहानी मेश्राम, मुस्कान कैरो, निधि शर्मा, कलश जैन, दर्शना शर्मा, सुजाता इंगले, गौरी भदौरिया, वंशिका सोलंकी सभी इंदौर से हैं और राशि चौरे खरगोन से हैं।