भारतीय शेयर बाजार में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों का रुख लगातार तीसरे महीने बिकवाली का बना रहा है। 2025 की शुरुआत से ये निवेशक भारतीय बाजार में शुद्ध विक्रेता बन चुके हैं। नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड के आंकड़ों के अनुसार, मार्च में FPI ने 3,973 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। इससे पहले जनवरी में 78,027 करोड़ [...]
Published: Monday 31 March, 2025 at 06:19 am | Modified: Monday 31 March, 2025 at 06:19 am | By: Kapil Sharma | 📂 Category: कारोबार
भारतीय शेयर बाजार में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों का रुख लगातार तीसरे महीने बिकवाली का बना रहा है। 2025 की शुरुआत से ये निवेशक भारतीय बाजार में शुद्ध विक्रेता बन चुके हैं। नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड के आंकड़ों के अनुसार, मार्च में FPI ने 3,973 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। इससे पहले जनवरी में 78,027 करोड़ रुपये और फरवरी में 34,574 करोड़ रुपये की बिकवाली देखी गई थी।
हालांकि, मार्च के अंत में बिकवाली की गति कुछ कम हो गई। विशेषज्ञों का कहना है कि 21 मार्च से 28 मार्च के बीच विदेशी निवेशकों ने धीरे-धीरे खरीदारी की, जिससे कुल बिकवाली का प्रभाव थोड़ा कम हो गया।
बाजार में सुधार के संकेत
सेंसेक्स अभी भी अपने सर्वकालिक उच्च स्तर 85,978 अंकों से 8,500 अंक नीचे है। फिर भी, विदेशी निवेशकों ने मार्च के अंतिम हफ्तों में कुछ खरीदारी की, जिससे भारतीय बाजारों को थोड़ी राहत मिली।
अमेरिकी टैरिफ नीति से बाजार में अस्थिरता
वैश्विक बाजारों में अमेरिका की नई टैरिफ नीति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल में टैरिफ समानता पर जोर दिया है, जिसके अंतर्गत अमेरिका उन देशों पर उतना ही टैरिफ लगाएगा, जितना वे अमेरिका पर लगाते हैं।
इसके चलते भारतीय शेयर बाजार पर दबाव बना रहा, क्योंकि विदेशी निवेशक इस अस्थिरता से बचने के लिए निकासी कर रहे थे। हालांकि, फरवरी में मिली किफायती महंगाई दर के आंकड़ों ने भारतीय बाजार को कुछ सहारा दिया।
पिछले तीन सालों का बाजार प्रदर्शन
2024 में सेंसेक्स और निफ्टी ने 9-10 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की।
2023 में भारतीय बाजार 16-17 प्रतिशत बढ़े।
2022 में मात्र 3 प्रतिशत की मामूली वृद्धि देखने को मिली।
क्या आगे विदेशी निवेशक खरीदारी करेंगे?
मार्च के अंतिम हफ्तों में विदेशी निवेशकों की हल्की खरीदारी ने संकेत दिए हैं कि वे भारतीय बाजारों में फिर से रुचि ले सकते हैं। हालांकि, अमेरिका की टैरिफ नीति और वैश्विक बाजारों की अस्थिरता अब भी एक चुनौती बनी हुई है। अब यह देखना होगा कि अप्रैल में विदेशी निवेशक भारतीय बाजार में वापस आते हैं या बिकवाली का यह सिलसिला जारी रहता है।
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी केवल सूचना के उद्देश्य से है। यह बताना आवश्यक है कि मार्केट में निवेश जोखिमों के अधीन है। निवेशक के रूप में पैसा लगाने से पहले हमेशा विशेषज्ञ से सलाह लें। ABPLive.com की ओर से किसी को भी निवेश करने की सलाह नहीं दी जाती है।
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