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मध्य प्रदेश में अपराधी नहीं, पुलिस के बीच भय का माहौल… वर्दीधारी अब गुंडों को पकड़ने में हिचकिचा रहे हैं।

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मध्य प्रदेश में एक ही दिन में चार अलग-अलग स्थानों पर पुलिस पर हमलों की घटनाएं हुईं। इसके बाद से विभिन्न सवाल उठने लगे हैं। अगर पुलिस खुद सुरक्षित नहीं है, तो आम जनता का क्या होगा? इस पूरे मामले पर राजनीतिक बयानबाजी भी शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री मोहन यादव के गृह मंत्रालय का प्रभार संभालने के चलते विपक्ष और भी सक्रिय हो गया है।

मध्य प्रदेश में अपराधी नहीं, पुलिस दहशत में… वर्दी वाले बोल रहे गुंडों को पकड़ने में डर लगने लगा

HighLights

  1. मध्य प्रदेश में पुलिस पर हमले, अपराधियों का आतंक, पुलिसकर्मी दहशत में
  2. अगर पुलिस ही डरी हुई है, तो अपराध कैसे नियंत्रित होंगे
  3. विशेषज्ञ ने बताया कि अपराधियों के हौसले किस तरह बढ़ जाते हैं

अमित मिश्रा, Newsstate24, ग्वालियर। मध्य प्रदेश में एक ही दिन में पुलिस टीम पर चार हमले हुए। मऊगंज जिले के गड़रा गांव में आदिवासी गुंडों ने घेरकर एएसआई की हत्या कर दी, जिसमें कई पुलिसकर्मी घायल हुए।

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ग्वालियर में दो स्थानों पर पुलिस दल पर हमले हुए। वहीं इंदौर में हाई कोर्ट के सामने जाम लगाते वकीलों ने पुलिसकर्मियों पर हमला किया। पिछले कुछ महीनों में राज्य में पुलिस टीम पर हमलाने की कई घटनाएं हो चुकी हैं, जिससे कानून व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।

विपक्ष का आरोप… गृह मंत्रालय मोहन यादव के पास

पुलिस पर हो रहे हमलों के कारण अब विपक्ष सरकार पर निशाना साध रहा है। उनका कहना है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के गृह मंत्रालय के बावजूद राज्य की कानून व्यवस्था बिगड़ चुकी है।

यह पहली बार है जब लगातार हो रहे हमलों के कारण पुलिस खुद डरी हुई है। पुलिसकर्मी अब खुलकर कहने लगे हैं कि अपराधियों को पकड़ने में उन्हें डर लगने लगा है, जो कि एक चिंताजनक स्थिति है।

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मध्य प्रदेश कैडर के रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी एसएस शुक्ला का कहना है कि हत्या और हत्या के प्रयास जैसे मामलों में अपराधी राजनीतिक रसूख और सहयोगियों की मदद से सुनियोजित तरीके से कोर्ट में हाजिर हो जाते हैं।

जब पुलिस का डंडा नहीं चलता, तो अपराधी बेखौफ हो जाते हैं। यदि कोई पुलिस अधिकारी लंबे समय तक एक ही जिले में रहता है, तो उसके संबंध अपराधियों के साथ बन जाते हैं, जिससे उनकी हिम्मत बढ़ जाती है। मध्य प्रदेश में लंबे समय से निरीक्षकों के जिलों में बदलाव नहीं किया गया है।

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मप्र में पुलिस पर हमलों की प्रमुख घटनाएं

  • अगस्त 2024 में छतरपुर में पुलिस थाने पर भीड़ ने हमला कर पथराव किया था, जिसमें हाजी शहजाद अली का नाम सामने आया था।
  • राजगढ़ जिले के एक गांव में दिसंबर 2024 में राजस्थान पुलिस टीम पर हमला हुआ, जब वे चोरी करने वाले गिरोह को पकड़ने गए थे।
  • ग्वालियर के कंपू में कुछ दुकानदारों ने शराब पीने से रोकने पर एक सिपाही को पीटा। थाना प्रभारी को भी पीट दिया गया।
  • ग्वालियर के गोविंदपुरी चौकी के पास चेकिंग के दौरान सिपाही ने कार चालक को रोका, तो उसने सिपाही को पीट दिया और खुद को मंत्री का रिश्तेदार बताकर धमकी दी।

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छतरपुर के उपनिरीक्षक ने वीडियो में व्यक्त किया अपना दुख

छतरपुर जिले के सिविल लाइंस थाने के उपनिरीक्षक अवधेश कुमार दुबे ने फेसबुक पर लाइव आकर प्रदेश में पुलिस पर हो रहे हमलों के बारे में अपने दुख को साझा किया। इस वीडियो को पुलिस अधिकारियों और कर्मियों ने भी साझा किया।

सेना में 18 साल बिताने के बाद उपनिरीक्षक बने अवधेश कुमार दुबे ने कहा कि पिछले कुछ दिनों में मध्य प्रदेश पुलिस पर जो हमले हुए हैं, उससे वे काफी दुखी हैं। उन्हें महसूस हो रहा है कि उनकी ताकत कमजोर हो गई है।

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उपनिरीक्षक दुबे ने कहा कि पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने हमें कैसे शस्त्र दिए हैं, जिनसे हम दुश्मनों का सामना कर सकें। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और डीजीपी से निवेदन किया कि वे हमारी स्थिति पर ध्यान दें और हमें सुरक्षित रहने दें।

कपिल शर्मा डिजिटल मीडिया मैनेजमेंट के क्षेत्र में एक मजबूत स्तंभ हैं और मल्टीमीडिया जर्नलिस्ट के तौर पर काम करते हैं। उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से पत्रकारिता में मास्टर्स (पीजी) किया है। मीडिया इंडस्ट्री में डेस्क और ग्राउंड रिपोर्टिंग दोनों में उन्हें चार साल का अनुभव है। अगस्त 2023 से वे जागरण न्यू मीडिया और नईदुनिया I की डिजिटल टीम का हिस्सा हैं। इससे पहले वे अमर उजाला में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं। कपिल को लिंक्डइन पर फॉलो करें – linkedin.com/in/kapil-sharma-056a591bb