कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (CUET) अंडरग्रेजुएट (UG) प्रवेश परीक्षा अब भारत के प्रमुख विश्वविद्यालयों में एडमिशन का एक महत्वपूर्ण साधन बन चुका है। इस वर्ष लगभग 15 लाख छात्रों ने परीक्षा के लिए आवेदन किया है, जिससे प्रतिस्पर्धा और भी तीव्र हो गई है। इसलिए, एक अच्छे कॉलेज में दाखिला लेने के लिए उच्च रैंक लाना अत्यंत आवश्यक है। यदि आप CUET 2025 की तैयारी कर रहे हैं, तो यहां कुछ महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए हैं जो आपकी तैयारी को बेहतर बना सकते हैं।
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NCERT की किताबों को प्राथमिकता दें
CUET की तैयारी के लिए NCERT की किताबें बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) और यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) के अनुसार, इन किताबों से अध्ययन करने पर बेहतर परिणाम मिल सकते हैं। NCERT के प्रत्येक अध्याय को ध्यान से पढ़ें और मूलभूत अवधारणाओं को अच्छी तरह समझें। CUET में पूछे जाने वाले कई प्रश्न सीधे इन पुस्तकों से होते हैं, इसलिए इन्हें अनदेखा न करें।
परीक्षा पैटर्न को अच्छी तरह समझें
किसी भी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के लिए उसके पैटर्न को समझना बेहद महत्वपूर्ण है। CUET के परीक्षा पैटर्न को जानने से आप अपनी रणनीति को बेहतर बना सकते हैं और सही दिशा में तैयारी कर सकते हैं। परीक्षा के विभिन्न खंडों, प्रश्नों की संख्या, नकारात्मक अंकन और समय सीमा के बारे में पूरी जानकारी रखें ताकि परीक्षा के दिन कोई कठिनाई न हो।
बोर्ड परीक्षा के सिलेबस पर ध्यान दें
CUET में अधिकतर प्रश्न 12वीं कक्षा के बोर्ड परीक्षा के सिलेबस से पूछे जाते हैं। इसलिए, 12वीं कक्षा के विषयों को गहराई से पढ़ना बहुत आवश्यक है। इसके साथ ही, ध्यान रखें कि यदि दो छात्रों के अंक समान होते हैं, तो 12वीं के अंकों को टाई-ब्रेकिंग के लिए महत्व दिया जाता है। इसलिए, बोर्ड परीक्षा की तैयारी को भी गंभीरता से करें।
तीन चरणों में करें तैयारी
CUET की तैयारी को तीन चरणों में विभाजित करें:
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पहला चरण: बोर्ड परीक्षा के सिलेबस का आधा भाग पूरा करें।
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दूसरा चरण: बोर्ड परीक्षा का पूरा सिलेबस समाप्त करें।
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तीसरा चरण: CUET के उन विषयों पर ध्यान दें जो बोर्ड परीक्षा के सिलेबस में शामिल नहीं हैं।
इस तरह की योजना अपनाने से आपकी पढ़ाई अधिक प्रभावी होगी और आपको बेहतर परिणाम मिलेंगे।
नियमित रूप से मॉक टेस्ट दें
मॉक टेस्ट प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जब आपका सिलेबस पूरा हो जाए, तो नियमित रूप से मॉक टेस्ट देना शुरू करें। इससे आपको परीक्षा जैसा अनुभव मिलेगा, आपकी गति में सुधार होगा और टाइम मैनेजमेंट में भी मदद मिलेगी। मॉक टेस्ट के जरिए आप यह भी जान पाएंगे कि किन विषयों में आपको और अधिक अभ्यास की आवश्यकता है।
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