दुनिया की दो प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं अमेरिका और चीन के बीच बढ़ते व्यापारिक तनाव के बीच, चीन ने भारत से दोस्ती का हाथ बढ़ाया है। चीन ने भारत से अधिक सामान खरीदने और व्यापार सहयोग को बढ़ाने की इच्छा व्यक्त की है। बीजिंग में भारत के लिए चीन के राजदूत शू फेइहोंग ने कहा कि भारत [...]
Published: Thursday, 3 April 2025 at 05:11 am | Modified: Friday, 4 April 2025 at 04:44 am | By: Kapil Sharma | 📂 Category: कारोबार
दुनिया की दो प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं अमेरिका और चीन के बीच बढ़ते व्यापारिक तनाव के बीच, चीन ने भारत से दोस्ती का हाथ बढ़ाया है। चीन ने भारत से अधिक सामान खरीदने और व्यापार सहयोग को बढ़ाने की इच्छा व्यक्त की है। बीजिंग में भारत के लिए चीन के राजदूत शू फेइहोंग ने कहा कि भारत और चीन को व्यापार के नए अवसरों की खोज करनी चाहिए और भारतीय कंपनियों को चीनी बाजार में अपनी पहचान बनानी चाहिए।
शू फेइहोंग ने ग्लोबल टाइम्स के साथ बातचीत में कहा कि हम भारत के साथ व्यापारिक और आर्थिक सहयोग को सुदृढ़ करने के लिए तत्पर हैं और चीनी बाजार में उपयुक्त भारतीय उत्पादों का अधिक से अधिक आयात करने की इच्छा रखते हैं। उन्होंने भारतीय कंपनियों को चीन में व्यापार के अवसरों की खोज करने के लिए आमंत्रित किया और कहा कि वे हिमालय पार करके चीन के विकास में भागीदार बन सकते हैं।
चीन ने भारत से यह भी अपेक्षा की है कि वह चीनी कंपनियों के लिए एक निष्पक्ष और पारदर्शी कारोबारी माहौल तैयार करेगा। दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को और विकसित करने की चर्चा हो रही है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को एक संदेश भेजकर दोनों देशों के बीच और निकटता लाने पर जोर दिया है। यह संदेश भारत-चीन कूटनीतिक संबंधों की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर दिया गया।
भारत और चीन 2020 में गलवान घाटी में हुए संघर्ष के बाद से अपने संबंधों में सुधार की कोशिश कर रहे हैं। उस घटना के बाद भारत ने कई चीनी निवेशों पर प्रतिबंध लगा दिया था, जो अभी भी जारी हैं। हालाँकि, हालिया समय में दोनों देशों ने आपसी गश्त पर एक समझौता किया और जनवरी 2024 में सीधी उड़ानों को पुनः शुरू करने का निर्णय लिया।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जल्द ही रेसिप्रोकल टैरिफ लागू करने वाले हैं, जिससे वैश्विक व्यापार प्रणाली पर प्रभाव पड़ सकता है। ट्रंप का कहना है कि वे अमेरिकी उद्योगों को गोल्डेन एरा में ले जाना चाहते हैं और अमेरिका के साथ होने वाले व्यापारिक शोषण को समाप्त करना चाहते हैं।
ट्रंप पहले ही भारत को “टैरिफ किंग” और “टैरिफ अब्यूसर” कह चुके हैं। हालांकि, भारत उन कुछ देशों में से एक है जो अमेरिका के साथ व्यापारिक टकराव को सुलझाने और टैरिफ समझौते पर बातचीत करने की कोशिश कर रहा है।