इंदौर में मास्टर प्लान की सड़कों की क्षमता शहर के बढ़ते यातायात को संभालने में अपर्याप्त है। 17 साल पहले बनाई गई योजना के अनुसार बन रही ये सड़कें शहर की बढ़ती जनसंख्या और वाहन संख्या के अनुरूप नहीं हैं। एजेंसियों को नई सड़कों के साथ-साथ चौराहों पर ब्रिज और रिंग रोड की योजना पर भी तेजी से काम करना आवश्यक है।
HighLights
- मास्टर प्लान की सड़कें शहर के यातायात को संभालने में सक्षम नहीं हैं।
- नई सड़कों और ब्रिज की आवश्यकता है और इस पर तेजी से काम करना होगा।
- काम में देरी के कारण लाखों लोग प्रतिदिन जाम में फंसे रहते हैं।
प्रेम जाट, Newsstate24, इंदौर। मास्टर प्लान के अंतर्गत बनने वाले मेजर रोड में हुई देरी का प्रभाव लंबे समय तक शहरवासियों पर पड़ेगा। 17 साल पहले की गई योजना के तहत बन रही ये सड़कें अब शहर के यातायात को संभालने में सक्षम नहीं होंगी।
एजेंसियों को नई सड़कों के साथ-साथ चौराहों पर ब्रिज और रिंग रोड की योजना पर भी तेज गति से कार्य करना होगा। मास्टर प्लान के अंतर्गत सड़कों के निर्माण में देरी के कारण वाहन चालकों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
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खोदी गई सड़कें यातायात में बाधा उत्पन्न कर रही हैं
सड़कों के काम में देरी के चलते लाखों लोग रोजाना जाम में फंस रहे हैं। इससे समय और ईंधन दोनों की बर्बादी हो रही है। अधूरी और खोदी हुई सड़कें यातायात में रुकावट डाल रही हैं और दुर्घटनाओं का कारण बन रही हैं। जिन सड़कों पर निर्माण कार्य प्रारंभ हुआ है, उनका काम भी धीमी गति से चल रहा है।
इस स्थिति में लोगों को धूल और गड्ढों के कारण परेशान होना पड़ रहा है। जिन सड़कों पर कार्य हुआ है, वे भी अधूरी अवस्था में हैं। एमआर-5, एमआर-11 और एमआर-12 जैसी प्रमुख सड़कों की लागत अब कई गुना बढ़ गई है।
देरी से निर्माण लागत में वृद्धि
मास्टर प्लान की प्रमुख सड़कों की लंबे समय तक न बनने के कारण निर्माण लागत में वृद्धि हुई है। कई लोगों को स्थानांतरित भी करना पड़ेगा। एमआर-3 की निर्माण लागत पहले 34 करोड़ थी, जो अब 50 करोड़ के पार जा चुकी है। एमआर-4 की लागत भी 55 करोड़ के ऊपर पहुंच गई है। एमआर-11 का निर्माण 75 करोड़ रुपये में हो रहा है और एमआर-12 के निर्माण में 200 करोड़ से अधिक की राशि खर्च हो रही है।
अन्य शहरों से आने वाले वाहन शहर में प्रवेश करते हैं
एमआर-11 और एमआर-12 का निर्माण अधूरा होने के कारण भोपाल और अन्य शहरों से आने वाले वाहनों को उज्जैन रोड तक पहुँचने के लिए शहर में प्रवेश करना पड़ता है। वर्तमान में इन वाहनों का सबसे अधिक दबाव एमआर-10 पर है। अगर एमआर-11 बन गया होता तो वाहन बायपास से एबी रोड तक पहुँच सकते थे।
एमआर-12 के निर्माण से वाहनों को एबी रोड और उज्जैन रोड तक सीधी कनेक्टिविटी मिल जाती। इन दोनों सड़कों के अधूरे होने के चलते विजय नगर क्षेत्र में वाहनों का विशेष दबाव बढ़ गया है।
इनका निर्माण शुरू हो चुका है, पर कई बाधाएँ हैं
– एमआर-4: रेलवे स्टेशन और आइएसबीटी को जोड़ने वाली इस सड़क पर कई निर्माण कार्य चल रहे हैं।
– एमआर-5: इंदौर वायर से बड़ा बांगड़दा तक बनने वाली सड़क पर लक्ष्मीबाई मंडी के पास सुपर कारिडोर की ओर कई अतिक्रमण हैं।
– एमआर-11: बायपास से एबी रोड तक बनने वाली इस सड़क पर भी कई अतिक्रमण हैं। इसका समय पर निर्माण न होने की वजह से कई विकास अनुमतियों का जारी होना संभव हुआ है। अब इसका सर्वे कर नया लेआउट निर्धारित किया जा सकता है।
– एमआर-12: बायपास से एबी रोड होते हुए उज्जैन रोड को जोड़ने वाली सड़क पर बाधाएँ हैं। पिछले दो साल से इसका निर्माण टुकड़ों में हो रहा है। कैलोदहाला कांकड़ पर 100 से अधिक घरों की बाधा है। इनको विस्थापित करने पर विचार किया जा रहा है।
टुकड़ों-टुकड़ों में निर्माण कार्य
मास्टर प्लान की प्रमुख सड़क एमआर-11 का निर्माण कार्य शुरू हो चुका है। इसे दो साल में पूरा करने का लक्ष्य है। एमआर-12 का चार किलोमीटर हिस्सा टुकड़ों में बनाया जा चुका है। बाकी सड़क का काम जारी है। कान्ह नदी पर पुल का कार्य भी आरंभ हो चुका है। जल्द ही कैलोदहाला रेलवे क्रॉसिंग पर आरओबी का काम प्रारंभ किया जाएगा। इस सड़क को सिंहस्थ तक बनाने का लक्ष्य रखा गया है। – आरपी अहिरवार, सीईओ, आईडीए
सड़कों के लिए वित्तीय आवंटन किया गया है
मास्टर प्लान की कुछ सड़कों का कार्य प्रारंभ हो चुका है और कुछ का कार्य जल्द शुरू होगा। हमारा लक्ष्य सिंहस्थ से पहले मास्टर प्लान की सभी सड़कों को तैयार करना है। हमें विश्वास है कि हम इस लक्ष्य को प्राप्त कर लेंगे। सड़कों को चार पैकेज में करने का उद्देश्य भी यही है। सड़कों के लिए आवंटित राशि भी सुनिश्चित की जा चुकी है और कार्यादेश भी जारी हो चुके हैं। इसीलिए किसी भी प्रकार की दिक्कत नहीं आएगी। – शिवम वर्मा, नगर निगम आयुक्त इंदौर