रेसिप्रोकल टैरिफ के ऐलान के बाद आईटी सेक्टर और अन्य वैश्विक शेयरों में भारी गिरावट आई है। इसके विपरीत फार्मास्युटिकल्स के शेयरों में बढ़त देखी गई है। हालांकि, यह खुशी अधिक समय तक टिकने वाली नहीं है। यह उछाल इस वजह से आया क्योंकि ट्रंप प्रशासन ने फार्मा सेक्टर को अब तक टैरिफ से मुक्त रखा था। लेकिन अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या ट्रंप प्रशासन फार्मा पर टैरिफ लगाने का विचार कर रहा है।
इसकी ओर इशारा खुद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने किया है। एयरफोर्स वन में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि फार्मा के लिए जल्द ही कुछ नया शुरू होगा और मुझे लगता है कि जो हमने सोचा है वैसा हो सकता है।
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उनके इस बयान के बाद फार्मास्युटिकल्स का स्टॉक सुबह करीब 11 बजे अचानक गिर गया। निफ्टी फार्मा इंडेक्स को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ, जिसमें लगभग साढ़े चार प्रतिशत की गिरावट आई। अरबिन्दो फार्मा, लुपिन और आईपीसीए लैब्स के शेयरों में भी लगभग छह प्रतिशत की कमी आई।
ट्रंप ने बताया कि वे फार्मा को एक अलग श्रेणी के रूप में देख रहे हैं और भविष्य में इस पर घोषणाएं करने की योजना बना रहे हैं। इससे पहले, ट्रंप प्रशासन में सेवा दे रहीं केरोलिन लेविट ने भी संकेत दिया कि फार्मास्युटिकल्स को फिर से लाने पर विचार किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि हम अपनी महत्वपूर्ण सप्लाई चेन को बाहर से आउटसोर्स कर रहे हैं। क्या हम चाहते हैं कि हमारी जीवन रक्षक दवाएं चीन में बनें या अमेरिका में? यह एक सामान्य बुद्धिमत्ता की नीति है।
यह ध्यान देने योग्य है कि डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका के व्यापारिक साझीदार देशों पर 2 अप्रैल को लिबरेशन डे का जिक्र करते हुए टैरिफ लगाने की घोषणा की। भारत पर उन्होंने 26 प्रतिशत का टैरिफ लगाने की बात की है, जबकि भारत वर्तमान में अमेरिका पर लगभग 52 प्रतिशत का टैरिफ लगाता है।
ट्रंप के इस कदम की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना की जा रही है। इसके जवाब में कई देशों जैसे कनाडा और चीन ने अमेरिका पर जवाबी शुल्क लगाने की घोषणा की है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे व्यापार युद्ध शुरू होने की संभावना है और मंदी का खतरा भी बढ़ सकता है।