मध्य प्रदेश के नर्सिंग घोटाले से संबंधित हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। कोर्ट ने जनहित याचिकाकर्ता को नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता और संबद्धता से जुड़ी मूल फाइलें पढ़ने का आदेश दिया है। इसके बाद याचिकाकर्ता को तथ्यात्मक रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत करनी होगी। जबलपुर से समाचारदाता के अनुसार, मध्य प्रदेश हाई कोर्ट []
Published: Wednesday, 2 April 2025 at 03:06 pm | Modified: Thursday, 3 April 2025 at 06:12 pm | By: Kapil Sharma | 📂 Category: शहर और राज्य
मध्य प्रदेश के नर्सिंग घोटाले से संबंधित हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। कोर्ट ने जनहित याचिकाकर्ता को नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता और संबद्धता से जुड़ी मूल फाइलें पढ़ने का आदेश दिया है। इसके बाद याचिकाकर्ता को तथ्यात्मक रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत करनी होगी।
जबलपुर से समाचारदाता के अनुसार, मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के पूर्व आदेश के अनुसार, राज्य सरकार ने नर्सिंग घोटाले से जुड़ी अपात्र संस्थाओं की मान्यता और संबद्धता की मूल फाइलें प्रस्तुत की हैं। इन फाइलों की संख्या हजारों में है।
न्यायमूर्ति संजय द्विवेदी और न्यायमूर्ति अचल कुमार पालीवाल की विशेष युगलपीठ ने जनहित याचिकाकर्ता, ला स्टूडेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अधिवक्ता विशाल बघेल को यह जिम्मेदारी दी है कि वे महाधिवक्ता कार्यालय में इन फाइलों का ध्यानपूर्वक अध्ययन करें। इसके बाद उन्हें उन अपात्र नर्सिंग कॉलेजों को मान्यता देने वाले जिम्मेदार व्यक्तियों के नाम सहित रिपोर्ट पेश करनी होगी।
कोर्ट ने जनहित याचिकाकर्ता को निर्देश दिया है कि अपनी रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया जाए कि सीबीआइ जांच में अपात्र पाए गए नर्सिंग कॉलेजों को किन परिस्थितियों में अनुमति दी गई थी और इसमें कौन-कौन सी कमियां थीं।
हाई कोर्ट ने इससे पहले भी नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता से संबंधित फाइलें तलब की थीं। इसके परिणामस्वरूप जनहित याचिकाकर्ता द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट में राज्य में कागजों पर चल रहे नर्सिंग कॉलेजों और फैकल्टी के फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ था।
हाई कोर्ट ने नर्सिंग घोटाले से संबंधित तीन महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। इनमें अपात्र नर्सिंग कॉलेजों के छात्रों को 30 दिनों के भीतर उपयुक्त कॉलेजों में ट्रांसफर करना, मान्यता और संबद्धता की मूल फाइलों का अध्ययन करके रिपोर्ट पेश करना, और सीबीआइ जांच में जिन कॉलेजों में छात्रों का प्रवेश नहीं हुआ, उन्हें परीक्षा में बैठने के लिए अपात्र माना जाना शामिल है।
इसके अलावा, कोर्ट ने निर्देश दिया है कि सीबीआइ जांच में जिन कॉलेजों में कोई छात्र प्रवेशित नहीं पाया गया है, उन कॉलेजों के छात्रों को नामांकन और परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं होगी। याचिकाकर्ता ने कोर्ट को जानकारी दी थी कि कई कॉलेजों ने सीबीआइ को बताया था कि उनके यहां कोई छात्र प्रवेशित नहीं है।
कोर्ट ने याचिकाकर्ता के तर्कों को सुनने के बाद अपने पूर्व आदेश में संशोधन करते हुए नए निर्देश जारी किए हैं। अब कॉलेजों और छात्रों के नामांकन सीबीआइ जांच रिपोर्ट के आधार पर किए जाएंगे।
जनहित याचिकाकर्ता ने एक और आवेदन प्रस्तुत करते हुए कहा कि नर्सिंग काउंसिल द्वारा अपात्र पाए गए कॉलेजों के छात्रों को उपयुक्त कॉलेजों में ट्रांसफर नहीं किया जा रहा है, जिससे हजारों छात्रों के भविष्य पर संकट आ गया है। हाई कोर्ट ने आदेश दिया है कि अपात्र कॉलेजों में नामांकित छात्रों को एक महीने के भीतर उपयुक्त कॉलेजों में ट्रांसफर किया जाए।