भारत में जब भी अच्छे जूतों का जिक्र होता है, नाइकी के जूतों का नाम अवश्य लिया जाता है। यह कंपनी अपने महंगे जूतों के लिए जानी जाती है, इसलिए इनके जूते आमतौर पर अमीर लोगों के पैरों में नजर आते हैं।
हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ ने इस कंपनी को एक बड़ा झटका दिया है। इस कारण से, नाइकी के शेयर 3 मार्च को 6 प्रतिशत तक गिर गए थे। आइए जानते हैं कि कैसे ट्रंप के इस फैसले ने नाइकी के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं।
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नाइकी के लिए टैरिफ एक समस्या बन गया है। ट्रंप ने “लिबरेशन डे” के अवसर पर वियतनाम से आने वाले सामानों पर 46 प्रतिशत का अतिरिक्त टैरिफ लगा दिया। इस निर्णय से खेल सामग्री बनाने वाली बड़ी कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट आई है, विशेष रूप से नाइकी के। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, नाइकी के 50 प्रतिशत जूते और 28 प्रतिशत कपड़े वियतनाम में निर्मित होते हैं। इसी प्रकार, एडिडास के 39 प्रतिशत जूते भी वहीं से आते हैं।
वियतनाम का महत्व इस तथ्य में है कि वहां कम श्रम लागत, कुशल कार्यबल और बेहतर परिवहन अवसंरचना है, जिससे बड़े ब्रांड्स वहां उत्पादन करते हैं। लेकिन अमेरिका के साथ वियतनाम का 123.5 बिलियन डॉलर का ट्रेड सरप्लस होने के कारण ट्रंप ने इसे निशाना बनाया।
ट्रंप के इस निर्णय के बाद नाइकी के शेयरों में गुरुवार को 6.4 प्रतिशत की गिरावट आई। यह तब हुआ जब नाइकी पहले से ही ऑन और होका जैसे नए ब्रांड्स के कारण मार्केट शेयर खो रही थी। कंपनी के CFO मैट फ्रेंड ने पिछले महीने चेतावनी दी थी कि अगले क्वार्टर में रेवेन्यू में और कमी आएगी। मार्च में नाइकी के शेयर 20 प्रतिशत तक गिर चुके हैं।
सिर्फ वियतनाम ही नहीं, चीन और कंबोडिया से आयात पर भी भारी शुल्क लगाया गया है। चीन पर 34 प्रतिशत और कंबोडिया पर 49 प्रतिशत टैरिफ लगाया गया है। हॉन्ग कॉन्ग में नाइकी के सप्लायर शेनझोउ इंटरनेशनल के शेयरों में 18 प्रतिशत की गिरावट आई है, जो पिछले तीन वर्षों की सबसे बड़ी गिरावट है।
वियतनाम की स्थिति भी चिंताजनक हो गई है। फाइनेंशियल एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, वियतनाम के प्रधानमंत्री फाम मिन्ह चिन्ह ने ट्रंप के साथ गोल्फ खेलने का प्रस्ताव रखा था, ताकि व्यापार विवाद को सुलझाया जा सके। उन्होंने अमेरिकी आयात पर टैक्स कम किए और स्टारलिंक सेवाओं को भी मंजूरी दी। लेकिन ट्रंप ने इन प्रयासों को नजरअंदाज कर दिया है।